सबसे पहले थोक कारोबारों के लिए लॉन्च हो सकती है सीबीडीसी

Jagran Trending: Cryptocurrency और Digital Currency में क्या है फर्क? इनके बारे में जानें

Cryptocurrency vs digital Currency इन दिनों क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल करेंसी काफी चर्चाओं में रहती हैं। हालांकि बड़ी संख्या में अभी लोगों को इनके बारे में बहुत ज्यादा जानकारी नहीं है। ऐसे में चलिए आपको इन दोनों में अंतर क्या है इसके बारे में बताते हैं।

नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। मौजूदा डिजिटल मुद्रा बनाम क्रिप्टोकरेंसी समय में क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) और डिजिटल करेंसी (Digital Currency) की काफी चर्चा हो रही है लेकिन बहुत से लोग क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल करेंसी को एक डिजिटल मुद्रा बनाम क्रिप्टोकरेंसी ही मान रहे हैं जबकि ऐसा नहीं है, यह दोनों एक नहीं हैं। दोनों में बहुत अंतर है। 1 फरवरी, 2022 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि 'क्रिप्टो कोई करेंसी नहीं है, करेंसी वह होती है, जिसे केंद्रीय बैंक जारी करता है।'

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क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल करेंसी में फर्क?

डिजिटल करेंसी को देश के केंद्रीय बैंक द्वारा जारी किया जाएगा। इसे सरकार द्वारा रेगुलेट किया जाएगा। इसीलिए, सरकारी डिजिटल करेंसी में निवेश सुरक्षति होगा। सरकारी डिजिटल करेंसी को ऑफलाइन रुपये, डॉलर और बाकी विदेशी करेंसी में बदला जा सकेगा। वहीं, क्रिप्टोकरेंसी प्राइवेट करेंसी होती है। इसे डिजिटल एसेट कहा जाता है। कोई सरकार, क्रिप्टोकरेंसी का रेगुलेशन नहीं करती है।

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इसीलिए, क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करना खतरनाक होता है। क्रिप्टोकरेंसी मूल्य का एक भंडार होती है, इन्हें भी एन्क्रिप्शन द्वारा सुरक्षित किया जाता है। इन्हें उन्नत ब्लॉकचेन तकनीक के इस्तेमाल से बनाया जाता है। साधारण शब्दों में कहें, तो डिजिटल करेंसी, क्रिप्टोकरेंसी जैसे बिटकॉइन, डॉजीकॉइन, इथिरियम की तरह ही होगी लेकिन इसे सरकार रेगुलेट करेगी। यह एन्क्रिप्शन बेस्ड हो सकती है।

क्रिप्टोकरेंसी को रुपये में बदलने पर लगता है टैक्स

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ऑप्टिमा मनी मैनेजर्स के सीईओ पंकज मठपाल ने बताया कि क्रिप्टोकरेंसी को रुपये में बदलने पर टैक्स लगता है। यानी, अगर किसी व्यक्ति के पास क्रिप्टोकरेंसी है और वह चाहता है कि उसके बदले वह रुपया ले, तो ऐसे करने पर उसे टैक्स देना होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण 2022 में ऐलान किया था कि सरकार क्रिप्टोकरेंसी पर 30 फीसदी टैक्स लगाएगी। यह नियम एक अप्रैल से लागू हो गया है।

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फिलहाल, डिजिटल करेंसी को लेकर टैक्स के संदर्भ में ज्यादा जानकारी नहीं है। लेकिन, उम्मीद है कि क्योंकि डिजिटल करेंसी सरकार द्वारा रेगुलेट की जाएगी तो इसे कैश में बदलने पर टैक्स से दूर रखा जा सकता है।

Digital vs Cryptocurrency: वित्त मंत्री ने बताया डिजिटल करेंसी और क्रिप्टो में फर्क, वर्चुअल असेट पर टैक्स को लेकर दिया दो टूक जवाब

वित्त मंत्री के मुताबिक, आरबीआई के डिजिटल रुपये के अलावा क्रिप्टो वर्ल्ड में मौजूद सभी क्वाइन वर्चुअल असेट्स में गिने जाएंगे। इनके लेन-देन में अगर किसी को मुनाफा होता है तो हम उस पर 30 फीसदी टैक्स लगाया जाएगा।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

बजट 2022 में वर्चुअल डिजिटल असेट पर 30 फीसदी टैक्स लगाने का एलान किया गया। इसके बाद क्रिप्टोकरेंसी को लेकर तमाम अटकलें लगने लगीं। कई विशेषज्ञों ने इसे क्रिप्टोकरेंसी की तरफ भारत के बढ़ते कदम की तरह बताया। बजट के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने डिजिटल करेंसी और क्रिप्टो में फर्क बताया। साथ ही, वर्चुअल असेट पर लगने वाले 30 फीसदी टैक्स को लेकर भी साफ-साफ जानकारी दी।

वित्त मंत्री ने कही यह बात

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि रिजर्व बैंक डिजिटल करेंसी जारी करेगा। कोई भी मुद्रा 'करेंसी' तभी कहलाती है, जब केंद्रीय बैंक उसे जारी करता है। जो भी केंद्रीय बैंक के दायरे से बाहर है, उसे हम करेंसी नहीं कहेंगे। हम ऐसी 'करेंसी' पर टैक्स नहीं लगा रहे हैं, जिसे अभी जारी होना बाकी है। डिजिटल रुपये को RBI जारी करेगा, यही डिजिटल करेंसी कहलाएगी। इसके अलावा वर्चुअल डिजिटल दुनिया में जो कुछ है, वो असेट्स हैं।

किन वर्चुअल असेट्स पर लगेगा टैक्स

वित्त मंत्री के मुताबिक, आरबीआई के डिजिटल रुपये के अलावा क्रिप्टो वर्ल्ड में मौजूद सभी क्वाइन वर्चुअल असेट्स में गिने जाएंगे। इनके लेन-देन में अगर किसी को मुनाफा होता है तो हम उस पर 30 फीसदी टैक्स लगाया जाएगा। इस तरह के हर लेन-देन पर सरकार नजर रखेगी। वित्त मंत्री ने कहा कि क्रिप्टो की दुनिया में होने वाले हर लेन-देन पर एक फीसदी TDS लगाएंगे। इस तरह फर्क साफ है कि डिजिटल करेंसी वही होगी, जिसे इस साल RBI जारी करेगा। वहीं, क्रिप्टो की दुनिया में मौजूद अलग-अलग तरह की संपत्तियों के हर लेन-देन पर टैक्स लगेगा।

क्रिप्टोकरेंसी पर इस वजह से लगा टैक्स

इस मामले में नीति आयोग के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार ने कहा कि हम जिन्न को फिर से डिजिटल मुद्रा बनाम क्रिप्टोकरेंसी बोतल में बंद नहीं कर सकते। इस वजह से इस क्रिप्टोकरेंसी नाम के जिन्न पर टैक्स लगा दिया। इस तरीके से हम इस नए असेट क्लास को और उसके अस्तित्व को स्वीकार करते हैं।

आयकर में छूट नहीं देने पर भी दिया जवाब

इस पर वित्त मंत्री ने कहा कि हम डिजिटल मुद्रा बनाम क्रिप्टोकरेंसी यही दोहराना चाहेंगे कि हमने टैक्स नहीं बढ़ाया है। हमने दो साल से एक भी टैक्स नहीं लगाया है। पिछली बार पीएम मोदी का आदेश था कि घाटा कितना भी क्यों न हो, महामारी के दौर में जनता पर टैक्स का बोझ नहीं डालना है। पीएम मोदी ने इस बार भी यही आदेश दिया, जिसका ध्यान बजट में रखा गया। हमने महामारी की वजह से सरकार के सामने मौजूद चुनौतियों का टैक्स के जरिए राहत ढूंढने की कोशिश नहीं की है।

विस्तार

बजट 2022 में वर्चुअल डिजिटल असेट पर 30 फीसदी टैक्स लगाने का एलान किया गया। इसके बाद क्रिप्टोकरेंसी को लेकर तमाम अटकलें लगने लगीं। कई विशेषज्ञों ने इसे क्रिप्टोकरेंसी की तरफ भारत के बढ़ते कदम की तरह बताया। बजट के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने डिजिटल करेंसी और क्रिप्टो में फर्क बताया। साथ ही, वर्चुअल असेट पर लगने वाले 30 फीसदी टैक्स को लेकर भी साफ-साफ जानकारी दी।

वित्त मंत्री ने कही यह बात

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि रिजर्व बैंक डिजिटल करेंसी जारी करेगा। कोई भी मुद्रा 'करेंसी' तभी कहलाती है, जब केंद्रीय बैंक उसे जारी करता है। जो भी केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा बनाम क्रिप्टोकरेंसी डिजिटल मुद्रा बनाम क्रिप्टोकरेंसी के दायरे से बाहर है, उसे हम करेंसी नहीं कहेंगे। हम ऐसी 'करेंसी' पर टैक्स नहीं लगा रहे हैं, जिसे अभी जारी होना बाकी है। डिजिटल रुपये को RBI जारी करेगा, यही डिजिटल करेंसी कहलाएगी। इसके अलावा वर्चुअल डिजिटल दुनिया में जो कुछ है, वो असेट्स हैं।

किन वर्चुअल असेट्स पर लगेगा टैक्स

वित्त मंत्री के मुताबिक, आरबीआई के डिजिटल रुपये के अलावा क्रिप्टो वर्ल्ड में मौजूद सभी क्वाइन वर्चुअल असेट्स में गिने जाएंगे। इनके लेन-देन में अगर किसी को मुनाफा होता है तो हम उस पर 30 फीसदी टैक्स लगाया जाएगा। इस तरह के हर लेन-देन पर सरकार नजर रखेगी। वित्त मंत्री ने कहा कि क्रिप्टो की दुनिया में होने वाले हर लेन-देन पर एक फीसदी TDS लगाएंगे। इस तरह फर्क साफ है कि डिजिटल करेंसी वही होगी, जिसे इस साल RBI जारी करेगा। वहीं, क्रिप्टो की दुनिया में मौजूद अलग-अलग तरह की संपत्तियों के हर लेन-देन पर टैक्स लगेगा।

क्रिप्टोकरेंसी पर इस वजह से लगा टैक्स

इस मामले में नीति आयोग के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार ने कहा कि हम जिन्न को फिर से बोतल में बंद नहीं कर सकते। इस वजह से इस क्रिप्टोकरेंसी नाम के जिन्न पर टैक्स लगा दिया। इस तरीके से हम इस नए असेट क्लास को और उसके अस्तित्व को स्वीकार करते हैं।

आयकर में छूट नहीं देने पर भी दिया जवाब

इस पर वित्त मंत्री ने कहा कि हम यही दोहराना चाहेंगे कि हमने टैक्स नहीं बढ़ाया है। हमने दो साल से एक भी टैक्स नहीं लगाया है। पिछली बार पीएम मोदी का आदेश था कि घाटा कितना भी क्यों न हो, महामारी के दौर में जनता पर टैक्स का बोझ नहीं डालना है। पीएम मोदी ने इस बार भी यही आदेश दिया, जिसका ध्यान बजट में रखा गया। हमने महामारी की वजह से सरकार के सामने मौजूद चुनौतियों का टैक्स के जरिए राहत ढूंढने की कोशिश नहीं की है।

Digital Currency Vs Cryptocurrency : क्या होती है डिजिटल करेंसी, यह क्रिप्टोकरेंसी से कितनी अलग है?

भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) के डिप्टी गवर्नर टी रवि शंकर ने गुरुवार को केंद्रीय बैंक के डिजिटल करेंसी पेश करने के प्लान के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि आरबीआई ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है।

digitalcurrency

हाइलाइट्स

  • डिजिटल करेंसी का पूरा नाम सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (Central Bank Digital Currency) है।
  • जिस देश का केंद्रीय बैंक (Central Bank) इसे जारी करता है, उस देश की सरकार की मान्यता इसे हासिल होती है।
  • इसकी खासियत यह है कि इसे देश की सॉवरेन करेंसी (Sovereign Currency) में बदला जा सकता है।

नई दिल्ली
भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) ने गुरुवार को बड़ा एलान किया। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर (Deputy Governor) टी रवि शंकर ने इस बारे में बताया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक जल्द डिजिटल करेंसी (Digital Currency) पेश करेगा। उसने इसकी तैयारी शुरू कर दी है।

दरअसल, आरबीआई (RBI) ने बहुत पहले ही अपनी डिजिटल करेंसी लॉन्च करने का संकेत दे दिया था। दुनिया के कई दूसरे देशों के केंद्रीय बैंक भी डिजिटल करेंसी शुरू करने की तैयारी में हैं। क्या आप डिजिटल करेंसी का मतलब जानते हैं? आइए इसका मतलब जानते हैं और यह भी जानते हैं कि यह क्रिप्टोकरेंसी से कितना अलगा है।

क्या है डिजिटल करेंसी?
डिजिटल करेंसी का पूरा नाम सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (Central Bank Digital Currency) है। जिस देश का केंद्रीय बैंक (Central Bank) इसे जारी करता है, उस देश की सरकार की मान्यता इसे हासिल होती है। यह उस देश की केंद्रीय बैंक की बैलेंसशीट (Balance Sheet) में भी शामिल होती है। इसकी खासियत यह है कि इसे देश की सॉवरेन करेंसी (Sovereign Currency) में बदला जा सकता है। भारत के मामले में आप इसे डिजिटल रुपया कह सकते हैं। डिजिटल करेंसी दो तरह की होती है-रिटेल (Retail) और होलसेल (Wholesale)। रिटेल डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल आम लोग और कंपनियां करती हैं। होलसेल डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल वित्तीय संस्थाओं द्वारा किया जाता है।

डिजिटल करेंसी और क्रिप्टोकरेंसी में क्या अंतर है?
डिजिटल करेंसी (Digital Currency) और क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) में काफी अंतर है। सबसे बड़ा अंतर यह है कि डिजिटल करेंसी को उस देश की सरकार की मान्यता हासिल होती है, जिस देश का केंद्रीय बैंक इसे जारी करता है। इसलिए इसमें जोखिम नहीं होता है। इससे जारी करने वाले देश में खरीदारी के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे सॉवरेन मुद्रा में यानी उस देश की करेंसी में बदला जा सकता है। क्रिप्टोकरेंसी के साथ यह सुविधा नहीं मिलती है।

दूसरा, फर्क यह है कि डिजिटल करेंसी की वैल्यू में क्रिप्टोकरेंसी की तरह उतार-चढ़ाव नहीं होता है। क्रिप्टोकरेंसी की कीमत में बहुत उतार-चढ़ाव होता है। बिटकॉइन इसका उदाहरण है। पिछले तीन महीने में बिटकॉइन की कीमत गिरकर आधा से कम रह गई है। तीसरा, क्रिप्टोकरेंसी की माइनिंग होती है। इसके लिए ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होता है। इसके उलट डिजिटल करेंसी को केंद्रीय बैंक जारी करता है।

Explainer : सबसे पहले यहां लॉन्च हो सकता है डिजिटल रुपया! जानिए क्या है CBDC और कैसे आपको होगा फायदा

Digital Rupee : सीबीडीसी (CBDC) केंद्रीय बैंक द्वारा डिजिटल रूप में जारी एक लीगल टेंडर (Legal Tender) करेंसी है। यह फिएट करेंसी के समान ही है और फिएट करेंसी के साथ एक्सचेंजेबल है। केवल इसका रूप ही अलग है। ब्लॉकचेन द्वारा समर्थित वॉलेट का उपयोग करके डिजिटल फिएट मुद्रा या सीबीडीसी का लेन-देन किया जा सकता है।

Central Bank Digital Currency

सबसे पहले थोक कारोबारों के लिए लॉन्च हो सकती है सीबीडीसी

हाइलाइट्स

  • आरबीआई इसी वित्त वर्ष में लॉन्च करेगा अपनी डिजिटल करेंसी
  • सबसे पहले थोक कारोबारों में आ सकता है डिजिटल रुपया
  • डिजिटल रूप में जारी एक लीगल टेंडर होगा सीबीडीसी
  • सीबीडीसी से कर सकेंगे घरेलू और इंटरनेशनल लेनदेन

नई दिल्ली : भारतीयों को सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी यानी सीबीडीसी (CBDC) का बेसब्री से इंतजार है। एक फरवरी को अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने आरबीआई (RBI) द्वारा सीबीडीसी लॉन्च करने की घोषणा की थी। यह लॉन्चिंग मौजूदा वित्त वर्ष में ही होने की बात कही गई थी। अब रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि आरबीआई की इस डिजिटल करेंसी अर्थात डि़जिटल रुपया को चरणबद्ध तरीके से लाया जाएगा। चालू वित्त वर्ष में सबसे पहले थोक कारोबारों (Wholesale Businesses) में इसे लाया जा सकता है। गौरतलब है कि भारत में क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) को लेकर काफी अधिक क्रेज है। हालांकि, आरबीआई शुरू से ही निजी डिजिटल करेंसीज के विरोध में रहा है। आरबीआई ने ही पिछले साल अक्टूबर में सरकार के सामने सरकारी डिजिटल करेंसी का प्रस्ताव रखा था।

क्या है सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC)?

RBI के अनुसार, सीबीडीसी केंद्रीय बैंक द्वारा डिजिटल रूप में जारी एक लीगल टेंडर (Legal Tender) करेंसी है। यह फिएट करेंसी (Fiat Currency) के समान ही है और फिएट करेंसी (पेपर करेंसी या सिक्के) के साथ एक्सचेंजेबल है। डिजिटल मुद्रा बनाम क्रिप्टोकरेंसी केवल इसका रूप ही अलग है। इसका मतलब है कि भारतीय रुपये और सीबीडीसी में डिजिटल रूप के अलावा कोई फर्क नहीं है। ब्लॉकचेन द्वारा समर्थित वॉलेट का उपयोग करके डिजिटल फिएट मुद्रा या सीबीडीसी का लेन-देन किया जा सकता है।

हो सकेंगे घरेलू और इंटरनेशनल लेनदेन

हालांकि, सीबीडीसी का कॉन्सेप्ट सीधे बिटकॉइन से प्रेरित था। फिर भी यह विकेन्द्रीकृत वर्चुअल करेंसीज और क्रिप्टो एसेट्स से अलग है, जिन्हें सरकार द्वारा जारी नहीं किया जाता है। ये लीगल टैंडर भी नहीं होते। सीबीडीसी से यूजर घरेलू और इंटरनेशनल दोनों तरह के लेनदेन कर सकेगा। इसके लिए किसी तीसरी पार्टी या बैंक की आवश्यकता नहीं होगी।

क्या होगा सीबीडीसी से फायदा?

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने पिछले साल लोकसभा को बताया था, "सीबीडीसी की शुरूआत से कई महत्वपूर्ण फायदे होंगे। इनमें नकदी पर निर्भरता कम होना, लेनदेन की लागत में कमी और निपटान जोखिम में गिरावट आदि शामिल हैं। सीबीडीसी के आने से अधिक मजबूत, कुशल, विश्वसनीय, विनियमित और लीगल टेंडर-आधारित भुगतान विकल्प भी बनेंगे।" उन्होंने आगे कहा, 'हालांकि, इससे जुड़े जोखिम भी हैं, जिनका संभावित लाभों के खिलाफ सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करने की आवश्यकता है।'
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आरबीआई ने दिया था एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव

चौधरी ने कहा कि आरबीआई ने भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 में संशोधन का प्रस्ताव दिया है, जो इसे सीबीडीसी लॉन्च करने में सक्षम बनाएगा। सरकार उस समय संसद में एक विधेयक पेश करने की भी योजना बना रही थी, जो "कुछ अपवादों" के साथ "भारत में सभी निजी क्रिप्टोकरेंसी" को प्रतिबंधित करेगा। चौधरी ने लोकसभा को बताया, "सरकार को आरबीआई से अक्टूबर 2021 में भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 में संशोधन के लिए प्रस्ताव प्राप्त हुआ है। आरबीआई सीबीडीसी को बिना किसी व्यवधान के शुरू करने के लिए चरणबद्ध कार्यान्वयन रणनीति पर काम कर रहा है। ”

निजी डिजिटल करेंसीज के साथ हैं कई समस्याएं

आरबीआई बिटकॉइन, ईथर जैसी निजी क्रिप्टोकरेंसी के साथ मनी लॉन्ड्रिंग, टेरर फाइनेंसिंग, टैक्स चोरी आदि से जुड़ी चिंताएं जताता रहा है। साथ ही आरबीआई ने कहा है कि सीबीडीसी से डिजिटल मुद्रा के फायदे लोगों को मिलेंगे और जोखिम कम होगा।

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