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प्रवृत्ति विश्लेषण क्या है?

प्रश्न 50 : माध्य, माध्यिका और बहुलक एवं मानक विचलन को परिभाषित कीजिए तथा इनके गुण एवं दोष लिखिये।

उत्तर–समान्तर माध्य (Mean)— समान्तर माध्य किसी भी समष्टि अथवा प्रतिदर्श की केन्द्रीय प्रवृत्ति के लिए सर्वोत्तम माप माना जाता है। आँकड़ों के न्यूनतम एवं अधिकतम मानों के लगभग मध्य में औसत का मान सुनिश्चित रहता है। इसी को समान्तर माध्य कहते हैं। सामान्यतः समान्तर माध्य ज्ञात करने हेतु समाप्त मदों के मूल्यों के योग में मदों के योग में मदों की संख्या (Number of items) का भाग लगाया जाता है।


मदों की संख्या समान्तर माध्य के गुण (Merits of Mean)-

(1) सरल गणना (easy to calculate)

(2) समझने के लिए अति सुगम।

(3) चरों के सभी मानों को बराबर महत्त्व दिया जाता है।

(4) श्रेणी को क्रमबद्ध करने की आवश्यकता नहीं पड़ती, किसी भी रूप में गणना से प्राप्त उत्तर स्थिर होते हैं।

(5) आँकड़ों के समूह की केन्द्रीय प्रवृत्ति सुस्पष्ट करते हैं।

सामान्तर माध्य के दोष (Demerits of Mean)-

(2) निरीक्षण से ज्ञात करना सम्भव नहीं।

(3) सीमान्त मूल्यों का माध्यम पर सीधा प्रभाव।

माध्यिका (Median)–माध्यिका (median) से अभिप्राय है। आँकड़ों की श्रृंखला के मध्य का वह मान जो सम्पूर्ण वितरण को दो बराबर भागों में विभक्त कर दें। डॉ. ए. एल. बाउले के अनुसार, ''यदि एक समूह के मानों को उनके मापों के आधार पर क्रमबद्ध किया जाये तो लगभग बीच का मान माध्यिका होता है।''

कॉनर के अनुसार, 'माध्यिका आँकड़ों की श्रेणी का वह चर मान हैं जो समूह को दो बराबर भागों में विभाजित करता है जिससे एक भाग में सभी मूल्य माध्यिका से अधिक और दूसरे भाग में सभी मान उससे कम होते हैं।"

माध्यिका के गुण (Merits of median)-

(1) स्पष्टता (2) सरलता (3) गुणात्मक तथ्यों के लिए उपयुक्त (4) चरम मूल्यों का परिणाम प्रवृत्ति विश्लेषण क्या है? पर कोई प्रभाव नहीं (5) बिन्दु रेखीय प्रदर्शन सम्भव।

माध्यिका के दोष (Demerits of median)-

(1) प्रतिनिधित्व का अभाव

(2) प्रतिचयन का अभाव

(3) सीमान्त मूल्यों की उपेक्षा

(4) बीजगणितीय विवेचन संभव नहीं ।

बहुलक (Mode)— किसी श्रेणी में अथवा बारंबारता वितरण सारणी में चर का वह मान जो सबसे अधिक बार उपस्थित हो, उस श्रेणी का बहुलक (Mode) कहलाता है अर्थात् श्रेणी के चर का मान जिसकी आवृत्ति सर्वाधिक हो, बहुलक कहलाता है। दूसरे शब्दों में बहुलक के आस-पास ही उस श्रेणी के लगभग सभी चर मान केन्द्रित होते हैं। वितरण में यदि आवृत्ति एक ही चर मान पर वितरित रहती है। तो इसे एकल बहुलक कहते हैं तथा एक से अधिक चर मान पर सर्वाधिक आवृत्ति वितरित रहे तो इसे बहु-बहुलक कहते हैं।

बहुलक के गुण (Merits of mode)-

(1) बहुलक की सरलता से गणना की जा सकती है।

(2) बिन्दु रेखा द्वारा निर्धारण किया जा सकता है।

(3) बहुलक में गुणात्मक तथ्यों का प्रयोग किया जा सकता है।

(4) बहुलक श्रेणी का महत्त्वपूर्ण माप है।

(5) बहुलक पर चरम मूल्यों का न्यूनतम प्रभाव होता है।

बहुलक के दोष (Demerits of mode)-

(1) बहुलक में चरम मानों को कोई महत्त्व नहीं दिया जाता है।

(2) बहुलक ज्ञात करना अस्पष्ट तथा अनिश्चित रहता है।

(3) बहुलक को बीजगणितीय विवेचन नहीं किया जा सकता है, अतः यह अपूर्ण है।

(4) बहुलक में पदों को क्रमानुसार रखना आवश्यक है, इसके बिना बहुलक ज्ञात नहीं किया जा सकता है।

(5) बहुलक को यदि पदों की संख्या से गुणा किाय जाये तो पदों के कुल मानों का योग प्राप्त नहीं किया जा सकता है।

मानक विचलन (Standard Deviation)– विचलन को मूल मध्यक वर्ग विचलन के नाम से भी जाना जाता है।

परिभाषा– दिये गये प्राप्तांकों के मध्यमान के लिये गये प्रत्येक प्राप्तांक के विचलन के वर्गों के मध्यमान का वर्गमूल ही प्रमाणिक या मानक विचलन होता है।

इसमें माध्यम विचलन के दोषों को दूर करने का प्रयत्न किया गया है। प्रमाप विचलन के परिकलन में समस्त विचलन गणितीय क्रिया से स्वयं ही घनात्मक हो जाते हैं। प्रमाप विचलन को ग्रीक अक्षर (Sigma) σ से प्रदर्शित करते हैं।

मानक विचलन के गुण (Merits of Standard Deviation)-

(1) सभी मूल्यों पर आधारित

(2) उच्च गणितीय अध्ययन में महत्त्वपूर्ण

(4) प्रतिचयन के कारण परिवर्तनों का प्रभाव कम।

(5) बीजगणितीय चिह्नों की उपेक्षा नहीं।

मानक विचलन के दोष (Demerits of Standard Deviation)-

(1) कठिन गणना (2) सीमान्त मूल्यों का महत्त्व अधिक।

माध्य के गुण और दोष बहुलक के गुण और दोष माध्य माध्यक और बहुलक माध्य के गुण एवं दोष समांतर माध्य के गुण माध्यिका के गुण और दोष samantar madhya ke gun माध्य के गुण दोषों की विवेचना करें समान्तर माध्य के दोष माध्यिका के गुण बताइए बहुलक के गुण दोष bahulak ke gun aur dosh समांतर माध्य के गुण दोष माध्य माध्यिका और बहुलक में संबंध समांतर माध्य के गुण एवं दोष समांतर माध्य के गुण बताइए माध्य के गुण और दोष माध्यिका के गुण बताइए bahulak ke gun samantar madhya ke gun माध्य माध्यक और बहुलक में सम्बन्ध माध्यिका के गुण लिखिए प्रमाप विचलन के गुण माध्य के गुण दोषों की विवेचना करें बहुलक के गुण madhya ko paribhashit kijiye madhya madhika aur bahulak me sambandh माध्य माध्यिका बहुलक में संबंध लिखिए madhya madhyak bahulak me sambandh madhyika ki paribhasha bahulak kya hai

प्रवृत्ति (pravrtti) का अंग्रेजी अर्थ

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प्रवृत्ति का अंग्रेजी मतलब

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"प्रवृत्ति" के बारे में

प्रवृत्ति का अर्थ अंग्रेजी में, प्रवृत्ति का इंगलिश अर्थ, प्रवृत्ति का उच्चारण और उदाहरण वाक्य। प्रवृत्ति का हिन्दी मीनिंग, प्रवृत्ति का हिन्दी अर्थ, प्रवृत्ति का हिन्दी अनुवाद, pravritti का हिन्दी मीनिंग, pravritti का हिन्दी अर्थ।

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प्रवृत्ति विश्लेषण क्या है?

प्रश्न 50 : माध्य, माध्यिका और बहुलक एवं मानक विचलन को परिभाषित कीजिए तथा इनके गुण एवं दोष लिखिये।

उत्तर–समान्तर माध्य (Mean)— समान्तर माध्य किसी भी समष्टि अथवा प्रतिदर्श की केन्द्रीय प्रवृत्ति के लिए सर्वोत्तम माप माना जाता है। आँकड़ों के न्यूनतम एवं अधिकतम मानों के लगभग मध्य में औसत का मान सुनिश्चित रहता है। इसी को समान्तर माध्य कहते हैं। सामान्यतः समान्तर माध्य ज्ञात करने हेतु समाप्त मदों के मूल्यों के योग में मदों के योग में मदों की संख्या (Number of items) का भाग लगाया जाता है।


मदों की संख्या समान्तर माध्य के गुण (Merits of Mean)-

(1) सरल गणना (easy to calculate)

(2) समझने के लिए अति सुगम।

(3) चरों के सभी मानों को बराबर महत्त्व दिया जाता है।

(4) श्रेणी को क्रमबद्ध करने की आवश्यकता नहीं पड़ती, किसी भी रूप में गणना से प्राप्त उत्तर स्थिर होते हैं।

(5) आँकड़ों के समूह की केन्द्रीय प्रवृत्ति सुस्पष्ट करते हैं।

सामान्तर माध्य के दोष (Demerits of Mean)-

(2) निरीक्षण से ज्ञात करना सम्भव नहीं।

(3) सीमान्त मूल्यों का माध्यम पर सीधा प्रभाव।

माध्यिका (Median)–माध्यिका (median) से अभिप्राय है। आँकड़ों की श्रृंखला के मध्य का वह मान जो सम्पूर्ण वितरण को दो बराबर भागों में विभक्त कर दें। डॉ. ए. एल. बाउले के अनुसार, ''यदि एक समूह के मानों को उनके मापों के आधार पर क्रमबद्ध किया जाये तो लगभग बीच का मान माध्यिका होता है।''

कॉनर के अनुसार, 'माध्यिका आँकड़ों की श्रेणी का वह चर मान हैं जो समूह को दो बराबर भागों में विभाजित करता है जिससे एक भाग में सभी मूल्य माध्यिका से अधिक और दूसरे भाग में सभी मान उससे कम होते हैं।"

माध्यिका के गुण (Merits of median)-

(1) स्पष्टता (2) सरलता (3) गुणात्मक तथ्यों के लिए उपयुक्त (4) चरम मूल्यों का परिणाम पर कोई प्रभाव नहीं (5) बिन्दु रेखीय प्रदर्शन सम्भव।

माध्यिका के दोष (Demerits of median)-

(1) प्रतिनिधित्व का अभाव

(2) प्रतिचयन का अभाव

(3) सीमान्त मूल्यों की उपेक्षा

(4) बीजगणितीय विवेचन प्रवृत्ति विश्लेषण क्या है? संभव नहीं ।

बहुलक (Mode)— किसी श्रेणी में अथवा बारंबारता वितरण सारणी में चर का वह मान जो सबसे अधिक बार उपस्थित हो, उस श्रेणी का बहुलक (Mode) कहलाता है अर्थात् श्रेणी के चर का मान जिसकी आवृत्ति सर्वाधिक हो, बहुलक कहलाता है। दूसरे शब्दों में बहुलक के आस-पास ही उस श्रेणी के लगभग सभी चर मान केन्द्रित होते हैं। वितरण में यदि आवृत्ति एक ही चर मान पर वितरित रहती है। तो इसे एकल बहुलक कहते हैं तथा एक से अधिक चर मान पर सर्वाधिक आवृत्ति वितरित रहे तो इसे बहु-बहुलक कहते हैं।

बहुलक के गुण (Merits of mode)-

(1) बहुलक की सरलता से गणना की जा सकती है।

(2) बिन्दु रेखा द्वारा निर्धारण किया जा सकता है।

(3) बहुलक में गुणात्मक तथ्यों का प्रयोग किया जा सकता है।

(4) बहुलक श्रेणी का महत्त्वपूर्ण माप है।

(5) बहुलक पर चरम मूल्यों का न्यूनतम प्रभाव होता है।

बहुलक के दोष (Demerits of mode)-

(1) बहुलक में चरम मानों को कोई महत्त्व नहीं दिया जाता है।

(2) बहुलक ज्ञात करना अस्पष्ट तथा अनिश्चित रहता है।

(3) बहुलक को बीजगणितीय विवेचन नहीं किया जा सकता है, अतः यह अपूर्ण है।

(4) बहुलक में पदों को क्रमानुसार रखना आवश्यक है, इसके बिना बहुलक ज्ञात नहीं किया जा सकता है।

(5) बहुलक को यदि पदों की संख्या से गुणा किाय जाये तो पदों के कुल मानों का योग प्राप्त नहीं किया जा सकता है।

मानक विचलन (Standard Deviation)– विचलन को मूल मध्यक वर्ग विचलन के नाम से भी जाना जाता है।

परिभाषा– दिये गये प्राप्तांकों के मध्यमान के लिये गये प्रत्येक प्राप्तांक के विचलन के वर्गों के मध्यमान का वर्गमूल ही प्रमाणिक या मानक विचलन होता है।

इसमें माध्यम विचलन के दोषों को दूर करने का प्रयत्न किया गया है। प्रमाप विचलन के परिकलन में समस्त विचलन गणितीय क्रिया से स्वयं ही घनात्मक हो जाते हैं। प्रमाप विचलन को ग्रीक अक्षर (Sigma) σ से प्रदर्शित करते हैं।

मानक विचलन के गुण (Merits of Standard Deviation)-

(1) सभी मूल्यों पर आधारित

(2) उच्च गणितीय अध्ययन में महत्त्वपूर्ण

(4) प्रतिचयन के कारण परिवर्तनों का प्रभाव कम।

(5) बीजगणितीय चिह्नों की उपेक्षा नहीं।

मानक विचलन के दोष (Demerits of Standard Deviation)-

(1) कठिन गणना (2) सीमान्त मूल्यों का महत्त्व अधिक।

माध्य के गुण और दोष बहुलक के गुण और दोष माध्य माध्यक और बहुलक माध्य के गुण एवं दोष समांतर माध्य के गुण माध्यिका के गुण और दोष samantar madhya ke gun माध्य के गुण दोषों की विवेचना करें समान्तर माध्य के दोष माध्यिका के गुण बताइए बहुलक के गुण दोष bahulak ke gun aur dosh समांतर माध्य के गुण दोष माध्य माध्यिका और बहुलक में संबंध समांतर माध्य के गुण एवं दोष समांतर माध्य के गुण बताइए माध्य के गुण और दोष माध्यिका के गुण बताइए bahulak ke gun samantar madhya ke gun माध्य माध्यक और बहुलक में सम्बन्ध माध्यिका के गुण लिखिए प्रमाप विचलन के गुण माध्य के गुण दोषों की विवेचना करें बहुलक के गुण madhya ko paribhashit kijiye madhya madhika aur bahulak me sambandh माध्य माध्यिका बहुलक में संबंध लिखिए madhya madhyak bahulak me sambandh madhyika ki paribhasha bahulak kya hai

लेखांकन का अर्थ एवं परिभाषाएँ (Meaning and Definitions of Accounting)

लेखांकन का अर्थ एवं परिभाषाएँ (Meaning and Definitions of Accounting)

लेखांकन का अर्थ एवं परिभाषाएँ (Meaning and Definitions of Accounting) : आधुनिक युग में व्यवसाय के आकार में वृद्धि के साथ-साथ व्यवसाय की जटिलताओं में भी वृद्धि हुई है। व्यवसाय का सम्बन्ध अनेक ग्राहकों, आपूर्तिकर्ताओं तथा कर्मचारियों से रहता है और इसलिए व्यावसायिक जगत में सैकड़ों, हजारों या लाखों लेन-देन हुआ करते हैं। सभी लेन-देनों को मौखिक रूप से याद रखना कठिन व असम्भव है।

हम व्यवसाय का लाभ जानना चाहते हैं और यह भी जानना चाहते हैं कि उसकी सम्पत्तियाँ कितनी हैं, उसकी देनदारियाँ या देयताएँ (Liabilities) कितनी हैं, उसकी पूँजी कितनी है, आदि-आदि। इन समस्त बातों की जानकारी के लिए लेखांकन (Accounting) की आवश्यकता पड़ती है।

लेखांकन का अर्थ

अर्थ (Meaning) – सरल शब्दों में, लेखांकन का आशय वित्तीय स्वभाव के सौदों (या लेन-देनों) को क्रमबद्ध रूप में लेखाबद्ध करने, उनका वर्गीकरण करने, सारांश तैयार करने एवं उनको इस प्रकार प्रस्तुत करने से है जिससे उनका विश्लेषण (Analysis) व निर्वचन (Interpretation) हो सके। लेखांकन में सारांश का अर्थ तलपट (Trial Balance) बनाने से है और विश्लेषण व निर्वचन का आधार अन्तिम खाते (Final Accounts) होते हैं जिनके अन्तर्गत व्यापार खाता, लाभ-हानि खाता तथा चिट्ठा/स्थिति-विवरण या तुलन-पत्र (Balance Sheet) तैयार किए जाते हैं।

लेखांकन की परिभाषाएँ

परिभाषाएँ (Definitions) – अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ सर्टिफाइड पब्लिक एकाउंटेंट्स (AICPA) ने 1961 में लेखांकन की परिभाषा निम्न प्रकार दी थी:

“लेखांकन सौदों एवं घटनाओं को, जो आंशिक रूप में अथवा कम-से-कम वित्तीय प्रवृत्ति के होते हैं, प्रभावपूर्ण विधि से एवं मौद्रिक रूप में लिखने, वर्गीकृत करने और सारांश में व्यक्त करने तथा उनके परिणामों की व्याख्या करने की कला है।”

“Accounting is the art of recording, classifying and summarizing in a significant manner and in terms of money transactions and events which are, in part or at least of a financial character and interpreting the results thereof.” -AICPA

इस परिभाषा में लेखांकन के कार्य-क्षेत्र पर पूर्ण प्रकाश डाला गया है, इसमें केवल लेखे तैयार करना ही लेखांकन का कार्य नहीं माना गया वरन् लेखों का श्रेणीयन, विश्लेषण एवं व्याख्या पर भी बल दिया गया है। इस परिभाषा में लेखांकन से प्राप्त होने वाले सभी लाभों की स्पष्ट झलक मिलती है।

अमेरिकन एकाउंटिंग प्रिन्सिपल्स बोर्ड (AAPB) ने लेखांकन की परिभाषा निम्न शब्दों में दी है:

“Accounting is a service activity. Its function is to provide quantitative information, primarily financial in nature, about economic entities that is useful in making economic decisions, in making reasoned choices among alternative course of action.” -AAPB

इस परिभाषा के अनुसार लेखांकन एक सेवा क्रियाकलाप है। इसका कार्य आर्थिक इकाइयों के सम्बन्ध में परिमाणात्मक सूचनाएँ, मुख्यत: वित्तीय प्रकृति की, जो आर्थिक निर्णयों व वैकल्पिक उपायों में से सुविचारित चयन के लिए उपयोगी हैं, प्रदान करना है।

Previous : लेखांकन का उदगम एवं विकास

स्मिथ एवं एशबर्न के अनुसार, “लेखांकन मुख्यतः वित्तीय स्वभाव वाले व्यावसायिक व्यवहारों और घटनाओं के लिखने एवं वर्गीकरण करने का विज्ञान है और इन व्यवहारों व घटनाओं का महत्वपूर्ण सारांश बनाने, विश्लेषण करने, उनकी व्याख्या और परिणामों को उन व्यक्तियों को प्रेरित करने की कला है जिन्हें उनके आधार पर निर्णय लेने हैं।”

“Accounting is the science of recording and classifying business transactions and events, primarily of a financial character and the art of making significant summaries, analysis and interpretation of these transactions and events and communicating the results to persons who must make decisions or form judgements.” – Smith & Ashburne

इस परिभाषा में लेखांकन को विज्ञान और कला दोनों ही माना गया है। इसमें लेखांकन के क्षेत्र को, लेखों के आधार पर परिणाम निकालकर इनका विश्लेषण एवं व्याख्या करके व्यक्तियों तक पहुँचाना शामिल करके विस्तृत कर दिया गया है।

लेखांकन का अर्थ एवं परिभाषाएँ (Meaning and Definitions of Accounting) : Fast Revision

  • वित्तीय स्वभाव के सौदों (या लेन-देनों) को क्रमबद्ध रूप में लेखाबद्ध करने, उनका वर्गीकरण करने, सारांश तैयार करने एवं उनको इस प्रकार प्रस्तुत करने से है जिससे उनका विश्लेषण (Analysis) व निर्वचन (Interpretation) हो सके।
  • लेखांकन में सारांश का अर्थ तलपट (Trial Balance) बनाने से है और विश्लेषण व निर्वचन का आधार अन्तिम खाते (Final Accounts) होते हैं जिनके अन्तर्गत व्यापार खाता, लाभ-हानि खाता तथा चिट्ठा/स्थिति-विवरण या तुलन-पत्र (Balance Sheet) तैयार किए जाते हैं।
  • लेखांकन को विज्ञान और कला दोनों ही माना गया है।
  • लेखांकन मुख्यतः वित्तीय स्वभाव वाले व्यावसायिक व्यवहारों और घटनाओं के लिखने एवं वर्गीकरण करने का विज्ञान है और इन व्यवहारों व घटनाओं का महत्वपूर्ण सारांश बनाने, विश्लेषण करने, उनकी व्याख्या और परिणामों को उन व्यक्तियों को प्रेरित करने की कला है जिन्हें उनके आधार पर निर्णय लेने हैं।

हमे आशा है की आपको यह लेख ( लेखांकन का अर्थ एवं परिभाषाएँ (Meaning and Definitions of Accounting) ) पसंद आया होगा तथा आपको अपने पढाई में कुछ सहायता अवश्य मिली होगी।

प्रवृत्ति विश्लेषण क्या है?

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