146 साल का हुआ बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज: कैसा रहा BSE का 1875 से लेकर अब तक का सफर?, जानिए सबकुछ

आज बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) 146 साल का गया है। 9 जुलाई 1875 में BSE की स्थापना हुई थी। यह एशिया का पहला और सबसे तेज स्टॉक एक्सचेंज है। करीब 41 साल पहले 100 के आधार अंक से शुरू हुआ बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स आज 53,000 के पार पहुंच गया है। यानी सेंसेक्स में लगभग 530 गुना की बढ़ोतरी हुई है।

शेयर मार्केट की शुरुआत एक बरगद के पेड़ के नीचे 318 लोगों ने 1 रुपये के एंट्री फीस के साथ की थी। 25 जनवरी, 2001 को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने डॉलेक्स-30 लॉन्च किया था। इसे BSE का डॉलर लिंक्ड वर्जन कहा जाता है।

सेंसेक्स की शुरुआत कहानी
1986 में जब सेंसेक्स की शुरुआत हुई तो इसका बेस इयर 1978-79 को रखा गया और बेस 100 पॉइंट बनाया गया। जुलाई 1990 में ये आंकड़ा 1,000 पॉइंट पर पहुंच गया। 1991 के आर्थिक उदारीकरण के बाद सरकार ने FDI के दरवाजे खोले और बिजनेस करने के कानून में बदलाव किया। मार्केट वैल्यू का डिरेगुलेशन किया गया और अर्थव्यवस्था को सर्विस ओरिएंटेड कर दिया। इसने सेंसेक्स में गति बढ़ाई।

जब सेंसेक्स पहली बार बना, तब क्या बदलाव हुए
सबसे पहले सर्विस इंडस्ट्री, यानी बैंकिंग, टेलीकॉम और आईटी सेक्टर्स की कंपनियों को शामिल किया गया। इसके बाद 90 के दशक के अंत और 2,000 की शुरुआत में आईटी कंपनियों में तेजी से हो रहे डेवलपमेंट को देखते हुए पुरानी कंपनियों की जगह टीसीएस और इंफोसिस को शामिल किया गया। उदारीकरण के बाद से ही भारत की बड़ी कंपनियां घरेलू बिक्री पर ज्यादा निर्भर नहीं हैं। ये सभी कंपनियां एक्सपोर्ट के जरिए बिजनेस बढ़ाती रही हैं। वहीं आईटी सेक्टर में आउटसोर्सिंग की वजह से इन्फोसिस जैसी कंपनियों को फायदा हुआ है। टाटा शेयर बाजार Down कब होता है? जैसी ऑटोमोबाइल सेक्टर की कंपनी ने यूके जैसे विकसित बाजारों में कदम रखा है

हर्षद मेहता कांड:मार्च 1992 में सेंसेक्स पहली बार 4 हजार के स्तर पर बंद हुआ, लेकिन इसके बाद सेंसेक्स 2,900 से 4,900 के बीच झूलता रहा और इसे 5 हजार तक पहुंचने में सात साल से ज्यादा लग गया। इसका मुख्य कारण था कि इसी साल हर्षद मेहता के घोटाले का खुलासा होने से शेयर बाजार में भारी बिकवाली हुई थी।

2006 में 10 हजार पार
सेंसेक्स को 5 हजार से 10 हजार तक पहुंचने में 6 साल से ज्यादा समय लग गया। 7 फरवरी 2006 को सेंसेक्स 10,082.28 पर बंद हुआ, लेकिन अगले डेढ़ साल में ही सेंसेक्स 10 से 15 हजार के स्तर पर पहुंच गया।

सेंसेक्स के लिए 2007 सबसे बेहतरीन
9 जुलाई 2007 को शेयर बाजार Down कब होता है? सेंसेक्स 15,045.73 पर बंद हुआ। 2007 सेंसेक्स के लिए अब तक सबसे बेहतरीन साल रहा। अगले छह महीने में ही सेंसेक्स 20 हजार के स्तर पर पहुंच गया और दिसंबर 2007 शेयर बाजार Down कब होता है? में सेंसेक्स ने 20,000 का स्तर भी पार कर लिया था।

2008 की मंदी ने बाजार का खेल बिगाड़ा
8 जनवरी 2008 को सेंसेक्स ने कारोबार के दौरान पहली बार 21 हजार का स्तर पार किया था, लेकिन इसी साल आई अंतरराष्ट्रीय मंदी ने पूरा खेल बिगाड़ दिया था। मंदी की वजह से पूरी दुनिया के शेयर बाजारों के साथ ही भारतीय शेयर बाजार भी धड़ाम हो गए और 10 जनवरी 2008 को सेंसेक्स 14,889.25 के स्तर पर बंद हुआ. इसी साल 16 जुलाई को सेंसेक्स 12,575.8 पर बंद हुआ। इतना ही नहीं नवंबर 2008 में सेंसेक्स 8,451.01 के स्तर तक पहुंच गया था। इसके बाद सेंसेक्स को फिर वापस 21 हजार के स्तर तक जाने में करीब 3 साल लगे थे।

2014 में बाजार ने नरेंद्र मोदी का शानदार स्वागत किया
साल 2013 में BSE सेंसेक्स ने पलटी मारी और 18 जनवरी 2013 को सेंसेक्स फिर 20,039.04 पर बंद हुआ। 2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी। शेयर बाजार ने भी मोदी सरकार का जमकर स्वागत किया। 16 मई 2014 को ही सेंसेक्स 25,364 के स्तर तक पहुंच गया था। इसके बाद सेंसेक्स को 25 हजार शेयर बाजार Down कब होता है? से 30 हजार तक पहुंचने में तीन साल का समय लगा था।

साल 2017 में 30 हजार का स्तर
साल 2017 के अप्रैल महीने में सेंसेक्स 30,133 तक पहुंचा और अगले एक साल में ही सेंसेक्स 35 हजार के लेवल पर पहुंच गया। 17 जनवरी 2018 को सेंसेक्स 35,081 पर बंद हुआ। 30 अक्टूबर 2019 को सेंसेक्स ने 40,051 के स्तर को छू लिया था।

कोरोना संकट में बड़ा झटका लगा
सेंसेक्स जनवरी 2020 में 42 हजार के करीब पहुंच गया था, लेकिन इसके बाद साल 2020 का कोरोना ने तबाही मचाना शुरू कर दिया था। और यही कारण था कि सेंसेक्स मार्च 2020 में लॉकडाउन के बाद 25,981 तक पहुंच गया था, हालांकि अप्रैल के अंत और मई से सेंसेक्स में फिर से शानदार रिकवरी आने लगी।

15 महीने में 40 से 50 हजार का सफर
30 अक्टूबर 2019 को सेंसेक्स पहली बार 40,000 के पार बंद हुआ। विदेशी और घरेलू निवेशकों के दम पर सेंसेक्स ने करीब एक साल में ही 40 से 45 हजार तक का सफर तय कर लिया। 4 दिसंबर, 2020 को सेंसेक्स 45,079 पर बंद हुआ। इसके करीब डेढ़ महीने बाद ही सेंसेक्स ने 21 जनवरी 2021 को नया रिकॉर्ड बनाते हुए 50 हजार का आंकड़ा पार कर लिया।

किसने की थी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की शुरुआत?
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की शुरुआत 4 गुजराती और एक पारसी शेयर ब्रोकर्स ने की थी। 1850 के आसपास अपने कारोबार के सिलसिले में मुंबई के टाउन हॉल के सामने बरगद के एक पेड़ के नीचे बैठक किया करते थे। इन ब्रोकर्स की संख्या साल-दर-साल लगातार बढ़ती गई। 1875 में इन्होंने अपना 'द नेटिव शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स एसोसिएशन’ बना लिया, साथ ही, दलाल स्ट्रीट पर एक ऑफिस भी खरीद लिया। आज इसे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज कहा जाता है।

दैनिक भास्कर से खास बातचीत में BSE के MD & CEO आशीष चौहान ने कहा कि BSE अपनी स्थापना के बाद पिछले 146 सालों से भारत में इन्वेस्टमेंट और वेल्थ क्रिएशन के लिए काम कर रहा है। BSE की सफलता की कोशिश, 7.2 करोड़ से ज्यादा निवेशक खाते, 4,700 से ज्यादा रजिस्टर्ड कंपनियों और 231 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के इक्विटी मार्केट कैपिटलाइजेशन से देखी जा सकती है। BSE आने वाले समय में भारत को डबल डिजिट एनुअल ग्रोथ हासिल करने में मदद करेगा।

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शेयर बाजार Down कब होता है?

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बिज़नेस न्यूज़ डेस्क - कमजोर ग्लोबल संकेतों के बीच घरेलू शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिल रही है. आज के कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही सूचकांकों में भारी गिरावट है. सेंसेक्स 550 अंक से ज्यादा टूट चुका है। जबकि निफ्टी भी 18250 के आसपास कारोबार कर रहा है। आज बाजार में चौतरफा बिकवाली है। निफ्टी पर ऑटो, आईटी, मेटल, फार्मा और रियल्टी इंडेक्स आधा फीसदी से ज्यादा कमजोर हुए हैं. जबकि बैंक, फाइनेंशियल, एफएमसीजी सहित अन्य सूचकांकों में भी गिरावट देखने को मिल रही है। इस समय सेंसेक्स में 550 अंकों की कमजोरी है और यह 61,259.29 के स्तर पर कारोबार कर रहा है. जबकि निफ्टी 170 अंक टूटकर 18250 के स्तर पर है। दिग्गज शेयरों में बिकवाली दिख रही है। सेंसेक्स 30 के सभी शेयर लाल निशान में दिख रहे हैं। आज के टॉप लूजर में टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, एचयूएल, इंफोसिस, टाटा स्टील, एमएंडएम, मारुति, एयरटेल, विप्रो शामिल हैं। घरेलू शेयर बाजार के लिए ग्लोबल संकेत कमजोर दिख रहे हैं। आज के कारोबार में प्रमुख एशियाई बाजारों में बिकवाली है। जबकि पहले सोमवार को अमेरिकी बाजार लगातार चौथे दिन गिरावट के साथ बंद हुए थे। ब्रेंट क्रूड में फिर हल्की तेजी देखने को मिली है।

कच्चा तेल 80 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। जबकि अमेरिकी क्रूड 76 डॉलर प्रति बैरल पर है। जबकि अमेरिका में 10 साल की बॉन्ड यील्ड 3.692 फीसदी है। ब्रोकरेज हाउस आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने साल 2023 में निफ्टी के लिए 21400 का लक्ष्य रखा है। साल 2024 में लोकसभा के लिए चुनाव होने हैं। 2023 चुनाव से पहले का साल है। चुनाव से पहले के साल की बात करें तो बाजार का प्रदर्शन लगभग ज्यादातर समय बेहतर रहा है। आज यानी 20 दिसंबर को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज प्रोवाइडर एलिन इलेक्ट्रॉनिक्स का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए खुला है। इसमें निवेशक 22 दिसंबर तक पैसा लगा सकेंगे। इश्यू का आकार 475 करोड़ रुपये है। इसके लिए कंपनी ने प्रति शेयर 234-247 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है। लॉट साइज 60 शेयरों का होगा। हिंदुस्तान जिंक, एक वेदांता समूह की फर्म और दूसरी सबसे बड़ी जस्ता उत्पादक, अपने डीजल-चालित खनन वाहनों को बैटरी-चालित वाहनों में बदलने के लिए $100 मिलियन (8,270 करोड़ रुपये) से अधिक का निवेश करेगी। करने की योजना बना रहा है।

बोनस शेयर से होता है फायदा या नुकसान? टैक्स समेत जानें सभी बातें

Bonus Share: भविष्य में रिज़र्व और सरप्लस में से ही कंपनी अपने निवेशकों के लिए अतिरिक्त शेयर जारी करती है, जिसे बोनस शेयर कहते हैं

  • Vijay Parmar
  • Updated On - June 15, 2021 / 12:22 PM IST

बोनस शेयर से होता है फायदा या नुकसान? टैक्स समेत जानें सभी बातें

कोई भी व्यक्ति एलआईसी न्यू जीवन आनंद पॉलिसी खरीद सकता है. इस पॉलिसी के तहत न्यूनतम मूल बीमा राशि एक लाख रुपये है. सम एश्योर्ड की कोई अधिकतम सीमा नहीं है

Bonus Share: 21 वर्षीय निखिल पंचाल ने पिछले वर्ष आरती इंडस्ट्रीज के शेयर खरीदे थे. स्पेशियालिटी केमिकल और फार्मा मैन्युफैक्‍चरिंग से जुड़ी इस कंपनी ने मई-2021 में 1:1 बोनस का ऐलान किया था.

निखिल शेयर मार्केट में नया है और वो जानना चाहता है कि बोनस शेयर क्या है, उससे फायदा होता है या नुकसान और क्या ये टैक्सेबल होते हैं?

बोनस शेयर क्या है?

जब किसी कंपनी को अपने व्यापार से अतिरिक्त लाभ होता है, तो उस लाभ की पूंजी में से एक हिस्सा कंपनी अपने रिजर्व और सरप्लस में सुरक्षित रखती है और भविष्य में रिज़र्व और सरप्लस में से ही कंपनी अपने निवेशकों के लिए अतिरिक्त शेयर जारी करती है, जिसे बोनस शेयर कहते हैं.

बोनस शेयर से कंपनी की नेट वर्थ में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं होता है. क्योंकि बोनस शेयर बिलकुल फ्री होते हैं.

कब जारी होते हैं बोनस शेयर?

कंपनी हर साल बोनस शेयर जारी नहीं करती है. बल्कि कुछ खास मौकों पर ही जब कंपनी अच्छा परफॉर्म कर रही हो, कंपनी के रिज़र्व और सरप्लस काफी बढ़ चुके हो और कंपनी के शेयर की प्राइस भी बढ़ चुकी हो, तब कंपनी की शेयर कैपिटल बढ़ाने और शेयर की प्राइस कम करने के लिये बोनस शेयर जारी किये जाते हैं.

जितने शेयर पहले से उसी अनुपात में नये बोनस शेयर दिये जाते हैं

किसी निवेशक के पास जितने शेयर पहले से हैं, उसी के अनुपात में नये बोनस शेयर दिये जाते हैं. मान लीजिए, आपके पास XYZ कंपनी के 100 शेयर हैं और कंपनी प्रति दो शेयर के बदले में 1 (1:2 अनुपात) बोनस शेयर की घोषणा करती है.

यानी आपको 50 (100/2) बोनस शेयर मिलेंगे और आपके कुल शेयर की संख्या 150 हो जाएगी. अगर अनुपात 2:1 है, तो शेयरधारक को हर एक शेयर के बदले में दो और शेयर मिलते हैं.

मतलब कि निवेशक के पास 100 शेयर हैं, तो 200 और शेयर मिलेंगे और कुल शेयर 300 हो जाएंगे.

समझें इन तारीखों को

यह वह तारीख होती है जिस दिन कंपनी द्वारा बोनस देने की घोषणा की जाती है. यह वह तारीख होती है जिससे पहले अगर किसी निवेशक ने उस कंपनी के शेयर खरीदें होंगे, तो ही उसे बोनस शेयर दिया जायेगा.

यह वह तारीख होती है जिस दिन सभी निवेशकों के डिमेट अकाउंट में उस कंपनी के शेयर होना अनिवार्य है, जिनके अनुपात में कंपनी बोनस शेयर जारी करती है.

बोनस शेयर के फायदे

– बोनस शेयर मिलने से निवेशक के पास कंपनी के शेयर की संख्या बढ़ जाती है.

– जब कंपनी भविष्य में डिविडेंड का ऐलान करेगी तो बोनस शेयर के कारण आपको ज्यादा फायदा होगा, क्योंकि डिविडेंड प्रति शेयर दिया जाता है.

– बोनस शेयर जारी होने से शेयर की कीमत कम हो जाती है ओर मार्केट में शेयर बाजार Down कब होता है? कंपनी के शेयर की लिक्विडिटी बढ़ती है.

– निवेशकों में कंपनी पर भरोसा बढ़ता है.

इतना लगता है टैक्‍स

बोनस शेयर पर 10% लांग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स और 15% शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG) टैक्स लगता है. ये दोनों टैक्स की अवधि बोनस शेयर जब आपके डिमेट खाते में जमा होते हैं, तब से गिनी जाती है.

मान लीजिए, आपने 1 जनवरी, 2020 में XYZ कंपनी के 100 शेयर खरीदे थे और कंपनी ने जुलाई 2020 में 1:1 अनुपात में बोनस शेयर जारी किये थे.

यदि आप जून 2021 में सारे शेयर बेच देते है, तो पिछले साल में आपने खरीदे हुए 100 शेयर पर LTCG टैक्स लगेगा. वहीं, फ्री में मिले 100 बोनस शेयर पर STCG टैक्स चुकाना पड़ेगा.

2022 में IPO से जुटाई गई राशि हुई आधी, 35% हिस्सा अकेले LIC के IPO का

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बढ़ती मुद्रास्फीति के बीच ब्याज दरों में बढ़ोतरी और मंदी की आशंका के कारण 2022 का साल निवेशकों के लिए परेशानी भरा रहा.

इस साल सूचीबद्ध कंपनियों के शेयर मूल्य में शेयर बाजार Down कब होता है? गिरावट आने और भू-राजनीतिक तनाव के कारण आई अस्थिरता से प्राथमिक बाजारों में धारणाएं प्रभावित हुईं. इससे आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के जरिये वर्ष 2022 में महज 57,000 करोड़ रुपये ही जुटाए जा सके. नए वर्ष में इन गतिविधियों में और भी सुस्ती आने का अनुमान है. इस साल आईपीओ के जरिये जुटाए गए फंड में से 20,557 करोड़ रुपये यानी 35 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले एलआईसी के आईपीओ की थी. अगर इस साल एलआईसी का आईपीओ नहीं आया होता तो आरंभिक शेयर बिक्री से होने वाला कुल संग्रह और भी कम होता.

बढ़ती मुद्रास्फीति के बीच ब्याज दरों में बढ़ोतरी और मंदी की आशंका के कारण 2022 का साल निवेशकों के लिए परेशानी भरा रहा. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, ट्रू बीकन एंड जिरोधा के सह-संस्थापक निखिल कामत का कहना है, ‘‘दुनियाभर में वृद्धि के मंद पड़ने के बीच 2023 मुश्किल साल रहने वाला है. भारत में भी इसके दुष्प्रभाव नजर आएंगे. मेरा अनुमान है कि 2023 में बाजार नरम रह सकता है और आईपीओ के जरिये पूंजी जुटाने की गतिविधियों में भी अगले वर्ष कमी आ सकती है या फिर यह 2022 के स्तर पर ही रह सकता है.’’

जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेस में शोध प्रमुख विनोद नायर के मुताबिक, शेयर बाजारों में अस्थिरता रहने की आशंका के बीच 2023 में आईपीओ का कुल आकार कम रहने का अनुमान है. हाल में आए आईपीओ के कमजोर प्रदर्शन का भी निवेशकों पर असर पड़ने और उसकी वजह से निकट भविष्य में कमजोर प्रतिक्रिया रहने का अनुमान है.

16 दिसंबर तक आए 36 IPO

प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल 16 दिसंबर तक कुल 36 कंपनियां अपने आईपीओ लेकर आईं, जिससे 56,940 करोड़ रुपये जुटाए गए. अगले हफ्ते दो और कंपनियों के आईपीओ आने वाले हैं, जिसके बाद यह राशि और बढ़ जाएगी. वर्ष 2021 में 63 कंपनियों ने सार्वजनिक निर्गम से 1.2 लाख करोड़ रुपये जुटाये थे, जो बीते दो दशकों में आईपीओ का सबसे अच्छा साल रहा था. इसके पहले 2020 में 15 कंपनियों ने आईपीओ के जरिए 26,611 करोड़ रुपये जुटाये थे. आईपीओ के अलावा रूचि सोया की सार्वजनिक पेशकश में 4,300 करोड़ रुपये जुटाए गए थे.

किन कारणों से निवेशकों का बिगड़ा सेंटिमेंट

फरवरी में रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध छिड़ने की वजह से निवेशकों के लिए माहौल परेशानी भरा रहा क्योंकि भारत समेत दुनियाभर के बाजारों में गिरावट आई. इसके अलावा दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने बढ़ती शेयर बाजार Down कब होता है? मुद्रास्फीति को काबू में करने के लिए ब्याज दरें बढ़ाईं इससे भी प्राथमिक बाजार की धारणा प्रभावित हुई. इसका असर शेयरों के दाम पर पड़ा और कंपनियों ने आईपीओ लाने की योजना टाल दी.

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