कमोडिटीज की ज्यादातर ट्रेडिंग फ्यूचर डेरिवेटिव में होती है यानी कि हम इन चारों तरह के कमोडिटी पर अलग-अलग टाइम ड्यूरेशन के फ्यूचर कांट्रैक्ट की बाय और सेलिंग कर सकते हैं एक बात जो कमोडिटी फीचर्स को शेयर फीचर से अलग करती है वह यह है कि शेर के फीचर्स केवल 3 महीने के लिए होते हैं पर कमोडिटीज के फीचर्स से कहीं ज्यादा टाइम पर हो सकते हैं उदाहरण के लिए हम क्रूड आयल के सिक्स मंथ के लिए डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट बाय कर सकते हैं दोस्तों जिस तरह शेयर की ट्रेडिंग स्टॉक एक्सचेंज पर होती है वैसे ही Commodity Trading कमोडिटी एक्सचेंज पर होती है।

MCX पर ट्रेडिंग के समय में हुआ बदलाव, जान लीजिए पूरी डिटेल

सोमवार से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रिफ्रेंशिएबिल नॉन एग्री कमोडिटीज और एग्री कमोडिटीज (कपास, सीपीआई और कपास) में ट्रेडिंग सुबह 9 बजे शुरू हो गई

MCX Trading Timings : मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में ट्रेडिंग के समय में सोमवार से बदलाव हो गया। इसकी वजह यूएस डेलाइट सेविंग टाइमिंग्स है। नया समय सुबह 9 बजे से रात 11.30 बजे तक का है।

इस क्रम में, आज अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रिफ्रेंशिएबिल नॉन एग्री कमोडिटीज और एग्री कमोडिटीज (कपास, सीपीआई और कपास) में ट्रेडिंग सुबह 9 बजे शुरू हो गई। हालांकि, नए टाइम जोन में नॉन एग्री कमोडिटीज (non-Agri commodities) में रात 11.30 बजे तक ट्रेडिंग हो सकेगी, वहीं एग्री कमोडिटीज (Agri commodities) में रात 9 बजे तक ही ट्रेडिंग होगी।

MCX पर ट्रेडिंग के समय में हुआ बदलाव, जान लीजिए पूरी डिटेल

सोमवार से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रिफ्रेंशिएबिल नॉन एग्री कमोडिटीज और एग्री कमोडिटीज (कपास, सीपीआई और कपास) में ट्रेडिंग सुबह 9 बजे शुरू हो गई

MCX Trading Timings : मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में ट्रेडिंग के समय में सोमवार से बदलाव हो गया। इसकी वजह यूएस डेलाइट सेविंग टाइमिंग्स है। नया समय सुबह 9 बजे से रात 11.30 बजे तक का है।

इस क्रम में, आज अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रिफ्रेंशिएबिल नॉन एग्री कमोडिटीज और एग्री कमोडिटीज (कपास, सीपीआई और कपास) में ट्रेडिंग सुबह 9 बजे शुरू हो गई। हालांकि, नए टाइम जोन में नॉन एग्री कमोडिटीज (non-Agri commodities) में रात 11.30 बजे तक ट्रेडिंग हो सकेगी, वहीं एग्री कमोडिटीज (Agri commodities) में रात 9 बजे तक ही ट्रेडिंग होगी।

Commodity Trading क्या है शेयर मार्केट में कमोडिटी ट्रेडिंग क्या होता है

शेयर मार्केट में हम शेयर ट्रेडिंग के अलावा अक्सर एक शब्द और सुनते हैं Commodity Trading बहुत सारे लोग कई बार कंफ्यूज रहते हैं कि शेयर ट्रेडिंग और कमोडिटी ट्रेडिंग में क्या फर्क होता है इसीलिए आज हम इस जानकारी में कमोडिटी ट्रेडिंग क्या है? यही जानेंगे कि कमोडिटी क्या है कमोडिटी ट्रेडिंग कैसे किया जाता है हम इसमें किन चीजों की ट्रेडिंग कर सकते हैं।

Commodity-क्या-है-कमोडिटी-ट्रेडिंग-क्या-है

Commodity क्या है कमोडिटी ट्रेडिंग कैसे करते है।

Commodities का मतलब होता है ऐसी चीजें जिन्हें हम डेली लाइफ में यूज करते हैं और उन चीजों को कोई भी प्रोड्यूस करें हम उसे एक जैसा ही मानते हैं उदाहरण के लिए चावल, गेहूं, तेल, एलपीजी, सोना और सिल्वर और जिस तरह शेयर मार्केट में हम शेयर पर डेरिवेटिव ट्रेडिंग करते हैं ठीक उसी तरह हम कमोडिटी मार्केट कमोडिटी ट्रेडिंग क्या है? में कमोडिटीज डेरिवेटिव ट्रेडिंग कर सकते हैं।

कमोडिटी मार्केट में 4 तरह के कमोडिटीज में ट्रेडिंग होती है।

  1. Agri Commodity (एग्री कमोडिटीज क्या है)- जिसमें चीनी दाल सरसों का तेल चना सोयाबीन इलायची आते हैं
  2. Base Metals (बेस मेटल्स)- जैसे एलमुनियम कॉपर लेड निकेल और जिंक
  3. Precious Metals (प्रेशियस मेटल्स)- इसमें मिली दो कमोडिटी जाती है सोना और चांदी
  4. Anergy Commodity (एनर्जी कमोडिटीज)- जिसमें क्रूड आयल नेचुरल गैस आते हैं।

कमोडिटी ट्रेडिंग कितना रिस्की है

कमोडिटी में ट्रेडिंग करना शेयर्स में ट्रेनिंग करने से ज्यादा रिस्की होता है क्योंकि किसी भी कमोडिटी का प्राइस काफी कम समय में जल्दी से चेंज होता है इसकी वजह यह है कि कमोडिटीज में ऐसे प्रोडक्ट है कमोडिटी ट्रेडिंग क्या है? जो फिजिकल सप्लाई डिमांड पर बेचने हैं जैसे सऊदी अरेबिया में तेल को लेकर कोई इशू हो जाए तो क्रूड ऑयल की कीमत पर इसका बहुत प्रभाव पड़ सकता है। ठीक इसी तरह अगर भारत में शुगर की प्रोडक्शन जरूरत से काफी कमोडिटी ट्रेडिंग क्या है? कम हो जाए तो शुगर की प्राइस इंडियन कमोडिटी मार्केट में काफी तेजी से बढ़ सकती है।

दोस्तों कमोडिटीज में ट्रेडिंग डेरिवेटिव में होती है और डेरिवेटिव की ट्रेडिंग मार्जिन पर होती है। इस वजह से अगर हमारा ट्रेड गलत जगह हो गया तो हमें काफी नुकसान हो सकता है। पर अगर हमारा ट्रेड सही हुआ हमें मारजिंग की वजह से काफी ज्यादा प्रॉफिट भी हो सकता है। अगर हम कमोडिटी मार्केट में ट्रेड होने वाली किसी भी कमेटी में अच्छा नॉलेज है तो हम उसम ट्रेडिंग जरूर कर सकते हैं।

आपके इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो के लिए कितना जरूरी है कमोडिटी, यहां समझें पूरा गणित

आपके इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो के लिए कितना जरूरी है कमोडिटी, यहां समझें पूरा गणित

इन्वेस्टमेंट (Investment) के मामले में पंकज बड़े सीधे से कॉन्सेप्ट पर चलते हैं. पोर्टफोलियो में FD, म्यूचुअल फंड, PPF और स्टॉक्स होने चाहिए. एक दिन उनका कॉन्सेप्ट हिल गया. हुआ यूं कि उनके एक दोस्त ये जानकर हैरान रह गए कि पंकज का कमोडिटीज में कोई निवेश नहीं है. तो क्या कमोडिटीज (Commodities) में भी पैसा लगाना चाहिए था? क्‍या मैं पैसा बनाने से चूक गया? ये कमोडिटी ट्रेडिंग क्या है? सोचकर पंकज चकराए हुए थे. फिर पंकज ने खुद को तसल्ली दी कि यार कमोडिटीज के बारे में अपन जब कुछ जानते ही नहीं तो पैसा लगाना क्या कमोडिटी ट्रेडिंग क्या है? कमोडिटी ट्रेडिंग क्या है? ही ठीक होता. तब तो पंकज अपने दोस्त के सामने टालमटोल करके निकल गए. लेकिन, बात मन में अटक गई थी. ठान लिया कि गुरु, कमोडिटीज की गुत्थी सुलझा कर ही दम लूंगा. बस शुरू हो गया रिसर्च का दौर.

कमोडिटी कारोबार होता क्या है

पहली बात आई कि आखिर कमोडिटी कारोबार होता क्या है? खंगाला तो पता चला कि कमोडिटीज एक खास एसेट क्लास है. मोटे तौर पर शेयरों या बॉन्‍ड से इसका कोई रिश्‍ता नहीं होता. तो इसका क्या फायदा होता है? होता ये है कि कमोडिटीज में पैसा लगा हो तो स्‍टॉक और बॉन्‍ड पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करने में मदद मिलती है. आई बात समझ!! ना. पंकज सोच रहे हैं ऐसा कैसे कमोडिटी ट्रेडिंग क्या है? होता है?

तो बात ये है कि इसमें एक तो महंगाई से कवर मिलता है. दूसरा, आपको मिलेगा डायवर्सिफिकेशन. तीसरा, शेयरों और बॉन्ड के झंझटों का कोई असर नहीं. है कमोडिटी ट्रेडिंग क्या है? ना फायदे की बात. पंकज सोच में पड़ गए कि यार कमोडिटीज में निवेश मंहगाई से कैसे बचाता है. मसला जटिल नहीं है. ऐसा होता है कि जब महंगाई बढ़ती है तो कमोडिटीज की कीमतें ऊपर जाती हैं. इससे शेयर बाजार पर प्रेशर पड़ता है. दूसरी तरफ, महंगाई न बढ़े तो मार्केट और बॉन्ड बाजार बढ़िया कमोडिटी ट्रेडिंग क्या है? परफॉर्मेंस करते हैं. ये तो बात आ गई समझ. अब पंकज के दिमाग में कमोडिटी ट्रेडिंग क्या है? बड़ा सवाल ये आया कि आखिर कमोडिटीज में भी कहां लगाया जाए पैसा? तो ऐसा है कि गोल्ड एक सेफ एसेट के तौर पर मशहूर है. उथल-पुथल वाले हालात में ये खूब कमाई कराता है. और महंगाई बढ़ी तो हो गई बल्ले-बल्ले. क्योंकि तब तो गोल्ड और ऊपर भागता है.

एग्री कमोडिटीज में पैसा लगा सकते हैं छोटे निवेशक

अब पंकज सोच रहे हैं कि क्या गोल्ड में पैसा लगाना सही होगा? अब उन्होंने ली एक्सपर्ट एडवाइज. तो मोतीलाल ओसवाल फाइनेंश‍ियल के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट नवनीत दमानी कहते हैं कि आप एक्‍सचेंज पर ट्रेडिंग कर सकते हैं या सॉवरेन गोल्‍ड बॉन्‍ड में निवेश कर सकते हैं. आप ETF या डिजिटिल गोल्‍ड के जरिए भी निवेश कर सकते हैं. दाम गिरें तो खरीद लीजिए. छोटे निवेशक एग्री कमोडिटीज में भी पैसा लगा सकते हैं.

पंकज सोच रहे हैं इनमें क्या आता है. अरे भाई… तिलहन, वनस्‍पति तेल, मसाले, दाल, अनाज में होती है ट्रेडिंग. एग्रीकल्‍चर कमोडिटीज को MCX और NCDEX पर लिस्‍ट किया जाता है. इनवेस्‍टोग्राफी की फाउंडर और CFP श्‍वेता जैन कहती हैं, ‘छोटे निवेशक अपने एसेट का 10 फीसद हिस्‍सा गोल्‍ड और सिल्‍वर में रख सकते हैं. निवेशकों को हमेशा अपने टारगेट पर चलना चाहिए.<

कमोडिटी ट्रेडर्स के लिए बड़ी खबर, 14 मार्च से बदलेगा एमसीएक्स ट्रेडिंग का समय

कमोडिटी ट्रेडर्स के लिए बड़ी खबर, 14 मार्च से बदलेगा एमसीएक्स ट्रेडिंग का समय

14 मार्च से एमसीएक्स ट्रेडिंग का समय बदल जायेगा। यूएस डेलाइट सेविंग टाइमिंग में बदलाव के कारण मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एमसीएक्स) में ट्रेडिंग समय 14 मार्च से संशोधित किया जाएगा। सोमवार से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संदर्भ योग्य गैर-कृषि कमोडिटी के लिए ट्रेडिंग का समय सुबह 9 बजे से रात 11.30 बजे तक होगा।

कपास के लिए ट्रेडिंग टाइम
जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संदर्भ योग्य कृषि वस्तुओं जैसे कपास, सीपीओ और कपास के लिए ट्रेडिंग का समय सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक होगा। अन्य सभी कमोडिटी का कारोबार सुबह नौ से शाम पांच बजे के बीच होगा। उपरोक्त के लिए क्लाइंट कोड संशोधन सत्र व्यापार के समापन समय के ठीक बाद और लगभग 15 मिनट के लिए होगा। इससे पहले, 14 फरवरी को, एक्सचेंज ने एक्सचेंज के नियमों, उप-नियमों और कमोडिटी ट्रेडिंग क्या है? व्यावसायिक नियमों के प्रावधानों के संदर्भ में संशोधित ट्रेडिंग समय के बारे में अधिसूचित किया था।

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