म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर या डिविडेंड पर कितना टैक्स लगता है?

Wealth Guide: SWP और डिविडेंड पेआउट में से कौन है बेहतर, लंबी अवधि के मुनाफे के लिए यहां करें निवेश

Wealth Guide: बैंगलोर स्थित सेल्स मैनेजर दीपक जब अपनी रिटायरमेंट के करीब आए, तब उन्हें रिटायरमेंट के लिए प्लानिंग करना शुरू किया. दीपक के मुताबिक, वो अपनी एकमुश्त राशि को किसी बेहतरीन फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट में लगाना चाहते हैं. अब दीपक, ज्यादा जोखिम उठाने की क्षमता नहीं रखते इसलिए उन्होंने म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने का फैसला लिया. अब दीपक के सामने सवाल पैदा होता है कि म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने के लिए क्या उन्हें सिस्टैमेटिक विड्रॉल प्लान (SWP) या डिविडेंड प्लान में किसे चुनना चाहिए. दीपक की तरह ऐसे कई निवेशक हैं, जो रेगुलर और स्टेबल मंथली इनकम के बेहतरीन इंस्ट्रूमेंट में से किसी एक को चुनने का फैसला नहीं ले पाते हैं. लेकिन Bonanza Mutual Fund के प्रोडक्ट हेड प्रणव उप्पल ने निवेशकों के इस सवाल पर जवाब दिया है और बताया कि ज्यादा से ज्यादा पैसा बनाने के लिए कहां निवेश कर सकते हैं.

रेगुलर मंथली इनकम के लिए करें SWP

SWP यानी कि सिस्टैमेटिक विड्रॉल प्लान, म्यूचुअल फंड में निवेश करने का एक विकल्प है, जो निवेशक को उसके म्यूचुअल फंड स्कीम से फिक्स्ड या वेरिएवल अमाउंट विड्रॉ करने की इजाजत देता है. ये विड्रॉ मासिक, तिमाही, छमाही और सालाना आधार पर हो सकता है.

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कैसे काम करता है SWP?

मान लीजिए निवेशक ने 5 लाख रुपए SWP के जरिए एक 10 रुपए की NAV के साथ निवेश किए. ऐसे में निवेशक को 50000 यूनिट्स मिलेंगी. अगले साल जब निवेशक का पेआउट पीरियड शुरू हो जाएगा, कंपनी आपके अकाउंट में से 175 यूनिट रिडीम कर लेगी, जिसकी वैल्यू होगी 3500 रुपए (NAV के 20 रुपए होने की उम्मीद). इसके बाद निवेशक के अकाउंट में 49825 यूनिट्स बच जाएंगी. कंपनी ये पहले महीने में करेगी.

इसके अगले महीने NAV के अनुमानित 18 रुपए होने पर फंड हाउस 194.44 रिडीम करेगी. इसके बाद निवेशक के अकाउंट में 49630.55 यूनिट बचेगी. ऐसा SWP की अवधि खत्म होने तक चलता रहेगा. ऐसा करने से निवेशक को रुपए की औसत लागत में मदद मिलेगी.

डिविडेंड प्लान से कैसे अलग है SWP?

SWP, SIP से एकदम अलग काम करता है. SIP के जरिए कोई निवेशक रेगुलर बेसिस पर म्यूचुअल फंड में निवेश करता है. SWP के मामले में, म्यूचुअल फंड यूनिट्स को बेचकर पैसा बनता है और इसे निवेशक के अकाउंट में ट्रांसफर किया जाता है.

इसके अलावा, हर डिविडेंड पेआउट के बाद NAV (नेट एसेट वैल्यू) डिविडेंड अमाउंट से कम हो जाती है और डिविडेंड पेड अमाउंट से डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स को भी घटा दिया जाता है. डिविडेंड प्लान, म्यूचुअल फंड का एक विकल्प है जो डिविडेंड पेआउट भुगतान करने में मदद करता है. ये पेआउट मासिक, तिमाही और सालाना आधार पर होती है. ये डिविडेंड म्यूचुअल फंड स्कीम की ओर से कमाए गए प्रॉफिट के आधार पर बांटा जाता है.

एक निवेशक के तौर पर ये याद रखना जरूरी है कि डिविडेंड पेआउट की कोई गारंटी नहीं होती और ये बाजार और म्यूचुअल फंड स्कीम पर निर्भर करती है. वहीं SWP के जरिए निवेशक को रेगुलर बेसिस पर पैसा मिलता है.

(डिस्‍क्‍लेमर: यहां स्‍टॉक्‍स में निवेश की सलाह ब्रोकरेज हाउस/एक्‍सपर्ट द्वारा दी गई है. ये जी बिजनेस के विचार नहीं हैं. निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें.)

Dividend kya hota Hai | Dividend meaning in Hindi

Dividend kya hai क्या आपको पता है अगर dividend के बारे में कुछ भी पता नहीं है तो आपको हम Dividend meaning in hindi डिविडेंड कितना और कब मिलता है। की जानकारी देने वाले हैं। तो आईये जानते हैं डिविडेंड क्या होता है और कौनसी कंपनी Dividend देती हैं।

डिविडेंड क्या होता है | What is Dividend in Hindi

डिविडेंड का मतलब कंपनी के द्वारा अपने शेयर होल्डर को शुद्ध लाभ यानि Net Profit में कुछ हिस्सा कुछ राशि लाभ के रूप में देती हैं। कंपनी शेयर धारको की निवेश की गई राशि के हिसाब से देती हैं.

अगर टाटा के मेरे पास 200 शेयर है। और कंपनी एलान करती हैं 20₹ प्रति शेयर का Dividend देंगी तो मुझे 200×20 = 4000 रूपए मिलेंगे। अब तो आप Dividend ka matlab kya hai समझ गए हैं। अब Dividनिकाले ना ज़रूरी होता है क्या? तो चलिए जानते हैं।

कंपनी के लिए डिविडेंड देना ज़रूरी है या नहीं

ऐसी बहुत सारी कंपनी है जो डिविडेंड देती हैं। लेकिन अब कंपनी को डिविडेंड देना ही पड़ेगा ऐसा ज़रूरी नहीं है। कंपनी डिविडेंड देंगी या नहीं ये कंपनी के Board Member Decide करते डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स क्या होता है? हैं।

ऐसी भी कंपनी है जिनका डिविडेंड देने का काफी सालो से रिकॉर्ड रहा है। जो कंपनी अपने निवेशक को डिविडेंड देती हैं। मतलब वो काफी ज़्यादा मात्रा में प्रॉफिट कमा रही है। लेकिन कंपनी ज़्यादा प्रॉफिट कमाए डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स क्या होता है? तो डिविडेंड देगी। यह भी ज़रूरी नहीं है। अब तो आप समझ गए हैं। कंपनी पर डिविडेंड देना compulsory नहीं होता है

कंपनी कितना डिविडेंड दे सकती हैं

कंपनी अपने शेयर धारको को कितना डिविडेंड देगी ये उसके Face Value पर Decide निर्भर करता है। फेस वैल्यू क्या है। कंपनी जब रजिस्टर होती हैं। तो वह Face Value decide करती हैं। जैसे 20₹ फेस वैल्यू है तो इसका 50% Dividend देना होगा। मतलब वह अपने शेयर होल्डर को प्रति शेयर 10₹ का Dividend देगी। अब आपको कंपनी से डिविडेंड प्राप्त करने की लिए 4 अहम Date के बारे में अच्छे से पता होना चाहिए वह डेट ये हैं।

Devidend Declaration Date - ये दिन है जब कंपनी अपने शेयर होल्डर को डिविडेंड देने का एलान करती हैं।

Ex-Date - शेयर होल्डर ने इस तारीख से पहले शेयर ख़रीदा था सिर्फ उन्हें ही डिविडेंड मिलेगा।

Record Date - निवेशक के Demat Account में इस कंपनी के शेयर है उन्हीं को डिविडेंड दिया जाएगा।

Devidend Payout Date - इस दिन शेयर धारको को Devidend दिया जाता है।

इसे पड़े Motual funds क्या है और इसमें कैसे निवेश करे

डिविडेंड कब मिलता है | Devidend kab milta hai

interim devidend meaning in hindi कंपनी दो तरह से डिविडेंड देती हैं। पहला interim Dividend और दोसरा Final Dividend। कंपनी फाइनल डिविडेंड वित्त वर्ष के खत्म के बाद देती हैं। और interim Dividend को वित्त वर्ष के बीच में दे देती हैं।

डिविडेंड कैसे मिलता है | Devidend kaise milta hai

शेयर होल्डर के खाता में जो शेयर धारको के Demat Account से लिंक होता है उसमे डिविडेंड का पैसा जमा कर दिया जाता है जैसे आपने अपने demat account में SBI, HDFC, ICICI का बैंक अकाउंट जोड़ा है। तो आपकी डिविडेंड अमाउंट इस खाते में आयेगी।

डिविडेंड पर कितना टैक्स लगता है

शेयर होल्डर के पास जमा डिविडेंड के पैसों पर कोई टैक्स नहीं लगता है। क्यों पहले ही कंपनी की द्वारा डिविडेंड पर Dividend Distribution Tax दे दिया जाता हैं।

अब अगर से किसी शेयर धारको को साल में 10 लाख या इससे ज़्यादा का Dividend मिला है तो इसपे टैक्स देना होगा। ये Finance act 2016 section 115BBDA के तहत कहा गया है। जो प्राप्त की गई राशि पर टैक्स 10% लगेगा । अब आपको कंपनी से 15 लाख का Dividend amount मिली है। तो इसपर Dividend tax 15 हज़ार देना होगा।

कौनसी कंपनी डिविडेंड देती हैं

कौनसी कंपनी डिविडेंड देती हैं ये जानने के लिए इस लिंक पर क्लिक करे यहाँ से आप Dividend dene wali Company पता लगा सकते हैं। और आपको नीचे Dividend provide करने वाली कंपनी की लिस्ट भी दे रखी है।

1. ITC Ltd
2. Power Grid Corporation of india Ltd
3. Telecom Tower

सबसे ज़्यादा डिविडेंड कौनसी कंपनी देती हैं

सबसे ज़्यादा डिविडेंड देने के मामले पहला नंबर ITC Ltd का आता है। जो अपने शेयर धारको को लगातार कई सालो तक Cash Dividend देती आ रही है। और Current 2021 में इसने 2 बार Dividend दिया है।

आखरी बात

आपको Devidend kya hai.डिविडेंड का मतलब क्या होता है. what is Dividend meaning in hindi डिविडेंड की पूरी जानकरी आपको समझ आ गई होंगी। अगर आपकी मन में कुछ भी सवाल है तो कृपया कमेंट बॉक्स में लिखें। और नीचे दिए गए शेयर बटन की मदद से इस पोस्ट को शेयर ज़रूर करदे और हमारा फेसबुक ग्रुप भी ज्वाइन करले।

What is Direct Tax in Hindi | डायरेक्ट टैक्स क्या है? अपने आप को ओवरटैक्स होने से कैसे बचाएं?

What is Direct Tax in Hindi | डायरेक्ट टैक्स क्या है? अपने आप को ओवरटैक्स होने से कैसे बचाएं?

Direct Tax in Hindi: डायरेक्ट टैक्स नागरिकों द्वारा सरकार को सीधे भुगतान किया जाता है। Direct Tax क्या है? (What is Direct Tax in Hindi) विस्तार से समझने के लिए आगे पढ़ें। इसके अलावा आप यह भी जान सकते है कि टैक्स कैसे बचाएं? (How to save tax in Hindi)

Direct Tax in Hindi: टैक्स वह धन हैं जो सरकार द्वारा किसी भी देश के डेवलपमेंट के लिए फंड एकत्र किया जाता है। टैक्स देना हर किसी के जीवन का अभिन्न अंग है। राज्य या केंद्र सरकारें वे अथॉरिटीज हैं जो टैक्स लगती हैं, जिन्हें डायरेक्ट (Direct Tax) या इनडायरेक्ट टैक्स (Indirect Tax) के रूप में एकत्र किया जा सकता है। इनडायरेक्ट टैक्स वे हैं जो उपभोक्ताओं (Consumer) को बेची जाने वाली सेवाओं और वस्तुओं पर लगाए जाते हैं जबकि डायरेक्ट टैक्स नागरिकों द्वारा सरकार को सीधे भुगतान किया जाता है। Direct Tax क्या है? (What is Direct Tax in Hindi) विस्तार से समझने के लिए आगे पढ़ें।

डायरेक्ट टैक्स का क्या अर्थ है? | Meaning of Direct Tax in Hindi

What is Direct Tax in Hindi: डायरेक्ट टैक्स किसी व्यक्ति की इनकम पर लगाया जाता है और किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा कर अधिकारियों को सीधे भुगतान किया जाता है। इस टैक्स का भुगतान करने वाले व्यक्ति और संस्थान भुगतान की जिम्मेदारी किसी अन्य संस्था को ट्रांसफर नहीं कर सकते हैं।

कुछ प्रकार के डायरेक्ट टैक्स | Some Type of Direct Tax

1) आयकर (Income Tax)

एक व्यक्ति, एक HUF (Hindu Undivided Family) का सदस्य, या एक बिजनेस फर्म जिस टैक्स का भुगतान करता है, वह आयकर स्लैब के आधार पर होता है। यह एक बिजनेस, कैपिटल गेन और वेतन से किसी की इनकम पर लगाया जाने वाला एक अनिवार्य टैक्स है।

2) कॉर्पोरेट टैक्स (Corporate Tax)

यह उन कंपनियों और बिजनेस वेंचर पर लगाया जाने वाला टैक्स है, जिन्होंने भारतीय बाजार में कमाई की है। कॉर्पोरेट टैक्सेशन में FBT (फ्रिंज बेनिफिट टैक्स), STT (Securities Transaction Tax) और DDT (Dividend Distribution Tax) जैसे टैक्स शामिल हैं।

3) पूंजीगत लाभ कर (Capital Gain Tax)

कैपिटल गेन टैक्स विभिन्न निवेश साधनों और वैल्यू होल्डिंग्स के माध्यम से किए गए प्रॉफिट या गेन पर लगाया जाता है। होल्डिंग पीरियड इस टैक्स को या तो लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स या शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स के रूप में वर्गीकृत करता है और अलग-अलग एसेट्स के लिए अलग-अलग होता है। एक बार निवेश बेचे जाने के बाद यह टैक्स देय होता है।

4) वेल्थ टैक्स (Wealth Tax)

व्यक्तियों, एक HUF (हिंदू अविभाजित परिवार) के सदस्यों और कॉर्पोरेट प्रतिष्ठानों पर रियल स्टेट के ओनरशिप से प्रॉफिट या रिटर्न पर टैक्स लगाया जाता है। भारतीय निवासी अपनी ग्लोबल एसेट पर इस टैक्स का भुगतान करते हैं, जबकि NRI भारत में रखी संपत्ति के लिए इस टैक्स का भुगतान करते हैं।

जबकि ये करदाताओं पर लगाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के Direct Tax हैं, आइए देखें कि आप अधिक टैक्स से कैसे बच सकते हैं।

टैक्स कैसे बचाएं? | How to save tax in Hindi

कुछ तरीके जिनसे आप अधिक टैक्स से बच सकते हैं वे हैं-

1) टैक्स सेविंग निवेश विकल्प

फिक्स्ड डिपाजिट जैसे निवेश विकल्प, पारंपरिक निवेश विकल्प होने के बावजूद, ब्याज पर टैक्स आकर्षित करते हैं। अर्जित ब्याज पर उस दर पर आय के रूप में टैक्स लगाया जाता है जो निवेशक पर लागू होती है। इसके बजाय आप डेट म्यूचुअल फंड जैसे अधिक कर-कुशल साधन देख सकते हैं। जब तक आप अपना निवेश वापस नहीं लेते तब तक डेट फंड आपको टैक्स भुगतान को बंद करने का विकल्प प्रदान करते हैं। अगर आप इन्हें तीन साल तक रखते हैं तो आपको कम टैक्स का भी फायदा मिलता है। इन फंडों से अर्जित इनकम को तीन साल की डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स क्या होता है? अवधि के बाद लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के रूप में माना जाता है और इसलिए इस पर कम टैक्स लगता है।

2) किराए पर कटौती

अगर आप किराए पर रहते हैं और टैक्स लाभ प्राप्त करने के लिए सभी आवश्यकताओं को पूरा करते हैं, तो आपके पास हाउस रेंट अलाउंस (HRA) पर टैक्स कटौती का दावा करने का विकल्प है। हालांकि इसके लिए कोई ऊपरी सीमा नहीं है, लेकिन कुछ नियम हैं जो अधिकतम HRA कटौती को सीमित करते हैं।

3) डिविडेंड म्यूचुअल फंड के बजाय ग्रोथ विकल्प

डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स एक ऐसा टैक्स है जो बहुत सारे निवेशक बिना एहसास के चुकाते हैं। ये इक्विटी और इक्विटी से संबंधित इंस्ट्रूमेंट के अलावा म्यूचुअल फंड योजनाओं द्वारा भुगतान किए गए डिविडेंड पर लगाए जाते हैं। यहां, एक ग्रोथ विकल्प अधिक कर-कुशल है क्योंकि पूरी राशि कराधान के अधीन नहीं है। केवल कैपिटल गेन पर टैक्स लगाया जाता है।

4) इंश्योरेंस

इंश्योरेंस पॉलिसी के साथ आपको मिलने वाले कवरेज के अलावा, बीमा योजनाएं भी टैक्स-सेविंग के बेहतरीन विकल्प हैं। आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत, लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी पर भुगतान किए गए प्रीमियम टैक्स कटौती के लिए पात्र हैं। इसी तरह, आप अधिनियम की धारा 80डी के तहत हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम के लिए टैक्स कटौती का लाभ उठा सकते हैं।

Conclusion -

Direct Tax किसी व्यक्ति या संस्था की इनकम पर लगाया जाता है, जिसमें कैपिटल गेन, इनकम, वेल्थ और कॉर्पोरेट टैक्स शामिल हैं। हालांकि, आपके द्वारा भुगतान किए जाने वाले टैक्स की राशि को कम करने के कुछ तरीके टैक्स सेविंग इन्वेस्टमेंट, किराए में कटौती, ग्रोथ विकल्प और इंश्योरेंस पॉलिसी हैं। निष्कर्ष के तौर पर, कोई भी Direct Tax के भुगतान की जिम्मेदारी से नहीं बच सकता। हालांकि, डायरेक्ट टैक्स पर पैसे बचाने के प्रावधान हैं, जो व्यक्तियों के वित्तीय बोझ को कम कर सकते हैं।

म्यूच्यूअल फण्ड में ग्रोथ (Growth) और डिविडेंड (Dividend) विकल्प क्या होते हैं? किसमें करें निवेश?

म्यूच्यूअल फण्ड dividend और ग्रोथ विकल्प क्या होते हैं?

हर म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम में निवेश के दो विकल्प होते हैं|

#1 Growth (ग्रोथ)

आपको कोई डिविडेंड नहीं मिलता| अगर आपको अपने निवेश से कुछ पैसा चाहिए, तो आपको अपनी कुछ यूनिट्स को बेचना होगा| यूनिट्स बेचने पर जो मुनाफा होता है, उस पर आपको capital gains टैक्स देना होता है|

ग्रोथ विकल्प में आपका पैसा निवेशित रहता डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स क्या होता है? है आर बेहतर तरीके से कंपाउंड (compound) हो सकता है|

SBI BlueChip Fund-Growth

#2 Dividend (डिविडेंड)

समय-समय पर आपको dividend मिलता है| Dividend कब मिलना है और कितना मिलना है, यह आपकी इच्छा के अनुसार नहीं होता| फण्ड मेनेजर पर निर्भर करता है| साथ ही dividend केवल मुनाफे में से दिया जा सकता है| इसलिए अगर स्टॉक market अच्चा नहीं कर रहे, तो फण्ड की dividend देने की क्षमता प्रभावित हो सकती है|

SBI BlueChip Fund-Dividend

ध्यान दें dividend आपके पैसे से ही आता है| आपको जितना dividend मिलता है, उतना ही आपके फण्ड का NAV कम हो जाता है| दरअसल, NAV कुछ ज्यादा गिरता है क्योंकि dividend पर Dividend डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (DDT) भी लगता है| यह टैक्स आपको नहीं देना होता| म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी यह टैक्स काटकर ही आपको पैसा देती है|

जो dividend आपके हाथ में आता है, उस पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होता|

#3 Dividend Re-investment

यहाँ एक तीसरा विकल्प भी हैं| इस विकल्प में dividend आपके हाथ में नहीं आता| dividend दोबारा से म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश हो जाता है| बाकी सब, dividend विकल्प के सामान ही है|

ग्रोथ या डिविडेंड किस विकल्प में निवेश करें?

ग्रोथ विकल्प में आपके पास पैसा केवल यूनिट्स बेचें पर आता है| ऐसे में आपको कैपिटल गेन्स हो सकते हैं और उस पर आपको टैक्स देना होगा|

डिविडेंड विकल्प में आपके dividend पर DDT (डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स) लगता है|

इसलिए आपका निर्णय इस बात पर निर्भर करेगा की आपको किस पर कम टैक्स देना होगा|

Capital gain पर या Dividend पर?

अगर कैपिटल gain पर कम टैक्स देना होगा, तो Growth option बेहतर है|

अगर dividend पर कम टैक्स देना होगा, तो Dividend विकल्प बेहतर है|

म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर या dividend मिलने पर कितना टैक्स देना होता है?

इस बारे में मैंने इस पोस्ट में विस्तार से चर्चा करी है|

संक्षिप्त में जानकारी के लिए नीचे देख सकते हैं|

long term capital gain लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड शेयर dividend डिविडेंड पर टैक्स बजट 2018

म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर या डिविडेंड पर कितना टैक्स लगता है?

Dividend (डिविडेंड) और Growth (ग्रोथ) में क्या चुनाव करें?

यह निर्भर करेगा इन बातों पर:

  1. आप किस तरह के फंड में निवेश कर रहे हैं (इक्विटी या डेब्ट फण्ड)
  2. आप कितनी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं
  3. आप किस टैक्स स्लैब में आते हैं (केवल डेब्ट फण्ड में चुनाव प्रभावित होगा)

इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड (Equity Mutual Fund) में क्या करना चाहिए?

देखिये इक्विटी म्यूच्यूअल फंड में कम अवधि के लिए निवेश करना अच्छा विचार नहीं है|

अगर आप एक वर्ष से अधिक के लिए निवेश कर रहे हैं, तो आपको capital gain पर 10.4% टैक्स देना होगा| यहीं आपको dividend पर तकरीबन 11.5% का टैक्स देना होगा|

इसलिए ग्रोथ option बेहतर है|

अगर आप इक्विटी फण्ड में निवेश कर रहे हैं, तो ग्रोथ विकल्प (Growth option) में ही निवेश करें|

कुछ निवेशकों नियमित आय के लिए इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के विकल्प में निवेश करते हैं| यह एक बुरा आईडिया है| पहले तो dividend की कोई गारंटी नहीं है| दूसरी बात आप Growth option के यूनिट्स बेचकर भी अपनी ज़रुरत पूरी कर सकते हैं| डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स क्या होता है? टैक्स भी कम लगेगा| मैंने इस विषय पर दूसरे पोस्ट में विस्तार से चर्चा करी है|

डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड (Debt Mutual Fund) में क्या करना चाहिए?

अगर आप डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश कर रहे हैं, तो आपका निर्णय डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स क्या होता है? आपके टैक्स स्लैब और आपकी निवेश अवधि पर निर्भर करेगा|

अगर आप अपनी यूनिट्स को 3 वर्ष से पहले बेचते हैं, तो आपको मुनाफे पर अपनी टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा|

अगर आप अपनी यूनिट्स को 3 वर्ष के बाद बेचते हैं, तो आपको मुनाफे 20% (indexation के बाद) टैक्स देना होगा|

Dividend पर तकरीबन 28% DDT लगता है|

डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड में चुनाव करना आसान है|

अगर आप 5% या 20% वाले टैक्स स्लैब में आते हैं, तो Growth विकल्प में निवेश करें| निवेश अवधि से कोई फर्क नहीं पड़ता| Dividend विकल्प में 28% टैक्स लगेगा| मुनाफे पर केवल 5% या 20% टैक्स लगेगा|

अगर आप 30% टैक्स ब्रैकेट में आते हैं और 3 वर्ष से कम अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं, तो आपको Dividend (डिविडेंड) या Dividend Reinvestment विकल्प में निवेश करना चाहिए| मुनाफे पर 30% देना होगा, dividend विकल्प में 28% टैक्स ही लगेगा|

अगर आप 30% टैक्स ब्रैकेट में आते हैं और 3 वर्ष से अधिक अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं, तब भी आपको Growth option चुनना चाहिए| मुनाफे पर 20% (इंडेक्सेशन के बाद) टैक्स देना होगा, डिविडेंड पर 28% प्रतिशत लगेगा|

बजट की डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स क्या होता है? ABCD: कितने तरह के टैक्स लगाती है सरकार?

इस लेख में जानिए टैक्स के अलावा और कहां-कहां से आय प्राप्त करती है सरकार

बजट की ABCD: कितने तरह के टैक्स लगाती है सरकार?

बजट में आम लोगों की शायद सबसे ज्यादा दिलचस्पी इनकम टैक्स नियमों में बदलाव पर होती है. ये स्वाभाविक भी है क्योंकि आम लोगों की जेब पर सीधा असर इनकम टैक्स के नियम ही डालते हैं. टैक्स के अलावा और कहां से होती है सरकार की कमाई, इसका लेखा-जोखा भी बजट में होता है. इस लेख में हम यही जानेंगे कि केंद्र सरकार की आय कहां-कहां से होती है.

कहां से होती है सरकार को कमाई

सरकार की कमाई को दो हिस्सों में बांटा जा सकता है- कर राजस्व यानी टैक्स रेवेन्यू और गैर- कर राजस्व यानी नॉन-टैक्स रेवेन्यू. पहले बात करते हैं टैक्स रेवेन्यू की. टैक्स रेवेन्यू को भी दो हिस्सों में आप तोड़ सकते हैं- डायरेक्ट टैक्स और इनडायरेक्ट टैक्स.

डायरेक्ट टैक्स यानी प्रत्यक्ष कर वो टैक्स होता है जो व्यक्तियों और संस्थाओं से सरकार सीधा वसूलती है. डायरेक्ट टैक्स उसी करदाता को देना होता है जिस पर वो लगाया जाता है. डायरेक्ट टैक्स की देनदारी को किसी दूसरे व्यक्ति या संस्था पर ट्रांसफर नहीं किया जा सकता है. डायरेक्ट टैक्स के उदाहरण हैं:- इनकम टैक्स, वेल्थ टैक्स, कॉरपोरेट टैक्स, कैपिटल गेन्स टैक्स.

इनकम टैक्स- ये नागरिकों पर लगाया जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण टैक्स है. किसी नागरिक को अगर किसी भी स्रोत से कोई आमदनी होती है और वो अगर एक तय सीमा (टैक्सेबल इनकम) से ज्यादा है, तो फिर उस आमदनी पर आयकर या इनकम टैक्स देना होता है. आय के कई स्रोत हो सकते हैं जिनमें से कुछ इस तरह हैं:-

बिजनेस या प्रोफेशन से आय

कॉरपोरेट टैक्स- यह टैक्स उन कंपनियों पर लगाया जाता है, जिन्हें कानून की नजर में कंपनियों के शेयरहोल्डरों से अलग हस्ती माना जाता है. विदेशी कंपनियों को भी भारत से होने वाली आमदनी पर टैक्स देना होता है. ये आमदनी रॉयल्टी, ब्याज, कैपिटल गेन्स या फिर डिविडिंड किसी भी रूप में हो सकती है. मिनिमम ऑल्टरनेटिव टैक्स (मैट), फ्रिंज बेनेफिट टैक्स (एफबीटी) और डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (डीडीटी) भी कॉरपोरेट टैक्स के ही उदाहरण हैं.

इनडायरेक्ट टैक्स या अप्रत्यक्ष कर

इनडायरेक्ट टैक्स वस्तुओं और सेवाओं पर लगाया जाने वाला टैक्स है. ये टैक्स वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन, वितरण या बिक्री के वक्त लगाए जाते हैं. इसका सबसे अच्छा उदाहरण है जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स. कस्टम्स ड्यूटी और सेंट्रल एक्साइज टैक्स भी इनडायरेक्ट टैक्स के दायरे में ही आते हैं.

नॉन- टैक्स रेवेन्यू क्या होता है

नॉन- टैक्स रेवेन्यू का मतलब है सरकारी कंपनियों और सार्वजनिक प्रतिष्ठानों से मिलने वाला डिविडेंड, इंटरेस्ट इनकम और विनिवेश से होने वाली आय. सभी सरकारी कंपनियां और पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज, जिनमें सरकारी बैंक और आरबीआई भी शामिल हैं, हर साल केंद्र सरकार को अपने मुनाफे का एक हिस्सा डिविडेंड के रूप में देती हैं.

आम तौर पर डिविडेंड और इंटरेस्ट इनकम से ही नॉन- टैक्स रेवेन्यू का ज्यादातर हिस्सा आता है. केंद्र सरकार को इंटरेस्ट इनकम होती है उन कर्जों पर मिले ब्याज से, जो राज्य सरकारों, रेलवे या दूसरे संस्थानों को केंद्र सरकार देती है. इसके अलावा केंद्र सरकार की सामाजिक- आर्थिक सेवाएं जैसे मेडिकल, पावर और रेलवे भी नॉन- टैक्स रेवेन्यू का जरिया होती हैं.

विनिवेश भी है नॉन- टैक्स रेवेन्यू का जरिया

पिछले दो दशकों में विनिवेश या डिसइन्वेस्टमेंट भी केंद्र सरकार के लिए नॉन- टैक्स रेवेन्यू जुटाने का एक अच्छा जरिया बन चुका है. सरकारी विनिवेश का मतलब है सार्वजनिक उपक्रमों यानी पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज में सरकारी हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया.

विनिवेश की प्रक्रिया के तहत सरकार या तो अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच सकती है या फिर आंशिक हिस्सेदारी बेचकर कुछ पैसे जुटा सकती है. विनिवेश को उदारीकरण का हिस्सा माना जाता है. विनिवेश या तो किसी प्राइवेट कंपनी के पक्ष में किया जा सकता है या फिर सरकारी कंपनियों के शेयर पब्लिक को भी जारी किए जा सकते हैं.

टैक्स और नॉन- टैक्स रेवेन्यू से हुई कमाई का इस्तेमाल सरकार अपने खर्चों पर करती है. ये खर्च प्रशासनिक काम के अलावा सब्सिडी और विकास योजनाओं पर किया जाता है. लेकिन अगर सरकारी खर्च उसके राजस्व से ज्यादा होता है तो फिर उसकी भरपाई के लिए सरकार को उधार लेना पड़ता है.

लेखक धीरज कुमार अग्रवाल एक मीडिया प्रोफेशनल हैं और वेल्दी एंड वाइज (Wealthy & Wise) के नाम से फाइनेंशियल एजुकेशन पॉडकास्ट चलाते हैं.

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